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देश में मोहर सप्लाई करने वाली समिति में करोड़ों का फर्जीवाड़ा

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शहर के सिविल लाइंस इलाके में संचालित देशभर में मोहर सप्लाई करने वाली पोस्टल सील्स समिति में सात करोड़ रुपये से अधिक का फर्जीवाड़ा सामने आया है। समिति ने कई भुगतान बिना बिल के ही करके करोड़ों रुपये का कारोबार कर लिया। इसके अलावा कर्मचारियों का बोनस भी डकार लिया। इस मामले में डीएम चंद्रभूषण सिंह से शिकायत हुई तो उन्होंने ज्येष्ठ लेखा परीक्षक से जांच कराई। इस जांच में आरोप सही मिले हैं। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी जा चुकी है।
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सिविल लाइन क्षेत्र में पोस्टल सील्स समिति के नाम से एक औद्योगिक समिति है। देश भर में यहां से मोहरें आपूर्ति की जाती हैं। मोहर आपूर्ति की यह देश की एकलौती समिति है। डीएम को पिछले दिनों इसमें गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं। इस पर उन्होंने ज्येष्ठ लेखा परीक्षक विजय भूषण ओझा को जांच सौंपी। उन्होंने करीब सात करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता पकड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व अध्यक्ष ऊथान मोहम्मद एवं उनके भाई शेर मोहम्मद ने मिलीभगत करके करीब डेढ़ लाख का फर्जी भुगतान किया। इसके अलावा श्रमिकों के करीब 55 लाख से अधिक का बोनस ही नहीं बांटा। इसमें पूर्व सचिव रवेंद्र कुमार शर्मा व ऊथान मोहम्मद को दोषी करार दिया है। सात करोड़ से अधिक का बिना बिल के ही कारोबार किया गया। इसके लिए पूर्व अध्यक्ष व सचिव दोषी पाए हैं।
इस संबंध में समिति के अध्यक्ष सतीश चंद्र शर्मा ने बताया कि जांच निष्पक्ष हुई है। इस फर्जीवाड़े के खुलासे से समिति पर दाग लगा है। मगर, जो आरोप हैं, उनको सजा मिलेगी, इसको लेकर सभी खुश हैं। जांच अधिकारी ने पूर्व में हुई कुछ नियुक्तियों को भी गलत ठहराया है। साथ ही जो बोनस कर्मचारियों के हक का है, उसको देने का भी आदेश दिया है।
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