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अलीगढ़ : थाने में घुसकर पुलिस से मारपीट में भी आरोपी हैं पूर्व विधायक वीरेश

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समाजवादी पार्टी के चार बार के पूर्व विधायक वीरेश यादव के खिलाफ तीन नहीं, बल्कि चार मुकदमे दर्ज हैं। चौथा मुकदमा दादों थाने में भीड़ के साथ घुसकर पुलिस से मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा आदि धाराओं का है, जो खुद तत्कालीन एसओ की ओर से दर्ज कराया गया था। खास बात यह है कि शासन स्तर से इस मुकदमे की वापसी की संस्तुति हुई थी, मगर अदालत ने इसकी वापसी की अनुमति नहीं दी। तब से यह मुकदमा एसीजेएम द्वितीय की अदालत में लंबित है। निचली अदालत के एक मुकदमे में तलबी के प्रयास के दौरान यह दूसरा भी मुकदमा उजागर हुआ है। अब इन दोनों मुकदमों में तलबी कराने की अर्जी अदालत को दी गई है।
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पूर्व विधायक वीरेश यादव 4 मई को दो 25 वर्ष पुराने मुकदमों में न्यायालय में आत्मसमर्पण कर जेल गए हैं। उसके बाद उनके अधिवक्ता की ओर से निचली अदालत में विचाराधीन तीसरे मुकदमे में भी तलब कराने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी क्रम में तीसरे मुकदमे की जानकारी एकत्रित की जा रही थी। निचली अदालत में एमपी/एमएलए मामलों की विशेष कोर्ट एसीजेएम प्रथम के यहां इस मुकदमे की जानकारी में पता चला कि वीरेश यादव पर एक मुकदमा एसीजेएम द्वितीय की अदालत में लंबित है, जिसमें गैर जमानती वारंट जारी हैं, जब इस मुकदमे की जानकारी की तो पता चला कि यह मुकदमा वर्ष 1996 में तत्कालीन एसओ दादों राजाराम की ओर से वीरेश यादव सहित 23 नामजद व 25 अज्ञात पर थाने में घुसकर मारपीट व सरकारी कार्य में बाधा की धारा में दर्ज कराया था। अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित के अनुसार अब उनकी ओर से एसीजेएम प्रथम में लंबित मुकदमा व एसीजेएम द्वितीय की अदालत में लंबित मुकदमा में भी तलबी अर्जी दायर की गई है। एसीजेएम प्रथम न्यायालय ने 9 मई तलबी तारीख नियत कर दी है, जबकि द्वितीय की अदालत ने अभी अर्जी पर आदेश नहीं किया है।
शासन से हुई थी चौथे मुकदमे की वापसी की संस्तुति
वीरेश यादव के खिलाफ पुलिस की ओर से दर्ज इस मुकदमे में वीरेश यादव की मौके पर गिरफ्तारी हुई थी, जिसमें वह जेल जाने के बाद 23 फरवरी 1996 को एडीजे-13 की अदालत से जमानत पाकर रिहा हुए थे। बाद में सपा सरकार बनने पर 9 जून 2014 को न्याय अनुभाग की ओर से शासन के निर्देश पर मुकदमा वापसी की संस्तुति की गई, मगर अदालत ने इस संस्तुति पर यह कहते हुए अनुमति नहीं दी कि लोक हित का मामला है। मुकदमा वापसी की संस्तुति का कारण स्पष्ट नहीं है। निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ उसी वर्ष सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई, मगर 2016 में सत्र न्यायालय से भी वीरेश के पक्ष की अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद से मुकदमा अदालत में विचाराधीन है और लगातार हाजिर न होने के कारण गैर जमानती वारंट जारी हैं, जिसमें 17 मई को अगली तारीख नियत है। इस मुकदमे में अधिकांश आरोपियों की मौत हो चुकी है। वीरेश के अलावा तीन अदालत में लगातार हाजिर हो रहे हैं।
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नामांकन शपथ पत्र में बताए थे सिर्फ तीन मुकदमे
पूर्व विधायक वीरेश यादव ने हाल ही के विधानसभा चुनाव में अतरौली से सपा से नामांकन किया। इस दौरान उन्होंने अपने नामांकन पत्र में सिर्फ तीन मुकदमे बताए थे, जिसमें दो एडीजे-4 में लंबित हमले के मुकदमे, जबकि एक एसीजेएम प्रथम में लंबित 1997 के मुकदमे का उल्लेख था।
अदालत में पेश किए वीरेश, मांगी सुरक्षा और प्रोटोकॉल
एमपी/एमएलए मामलों की विशेष अदालत एडीजे-4 में पूर्व विधायक वीरेश यादव को शनिवार को पेश किया गया। बता दें कि पिछली तारीख पर जब अदालत ने वीरेश के खिलाफ कुर्की आदेश जारी किया था। उस दिन 7 मई तारीख नियत की थी। इसी क्रम में वीरेश को आज पेश किया गया। इस दौरान वीरेश यादव को जेल से सामान्य बंदियों के साथ एक ही वाहन में लाया गया। इसे लेकर वीरेश यादव के अधिवक्ता की ओर से अदालत को अर्जी दी गई कि चूंकि वीरेश यादव पूर्व विधायक हैं। इसलिए उनकी तमाम तरह के लोगों से राजनीतिक रंजिश है। उन्हें सुरक्षा को खतरा रहता है। अदालत ने तत्काल जेल अधीक्षक को विशेष सुरक्षा व नियमानुसार पेशी के आदेश दिए। इसके बाद उन्हें विशेष वाहन से अलग जेल ले जाया गया।
- वीरेश यादव आज सामान्य बंदियों के बीच कोर्ट लाए गए। इस पर न्यायालय को अवगत कराकर राजनीति रंजिश होने के कारण विशेष सुरक्षा व प्रोटोकॉल का अनुरोध किया, जिस पर आदेश किया गया है। अब तक निचली अदालत में सिर्फ एक मुकदमा जानकारी में था, मगर अब दूसरा मुकदमा भी संज्ञान में आया है। दोनों में तलबी अर्जी दी गई है, जिसमें से एक में 9 मई की तारीख नियत की है। दूसरे में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।-चंद्रशेखर दीक्षित, अधिवक्ता वीरेश यादव
- ये है इन दोनों मुकदमों का विवरण--
- 6 फरवरी 1996 को एसओ दादों राजाराम सिंह ने अपने थाने में मुकदमा दर्ज किया, जिसमें वीरेश यादव सहित 23 नामजद व 25 अज्ञात आरोपी। गिरफ्तारी के बाद वीरेश को जमानत मिली थी।
- 27 मई 1997 को रमाशंकर सिंह की ओर से दादों थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें वीरेश आदि पर गाली-गलौज व धमकी का आरोप है, जिसमें अग्रिम जमानत अर्जी 9 सितंबर 2021 को खारिज हो चुकी है।
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