अलीगढ़ के मशहूर ताला कारोबारी जफर आलम को हराकर अलीगढ़ नगर पालिका के आखिरी चेयरमैन बने मशहूर देसी घी कारोबारी ओपी अग्रवाल का निधन हो गया है। वह 1 सितंबर को रामघाट रोड स्थित केके हॉस्पिलट में भर्ती हुए थे। सर्दी-जुकाम होने के बाद उन्हें हृदय से संबंधित समस्या हो गई थी। हाल ही में वह अस्पताल से घर आ गए थे और सोमवार की सुबह लगभग आठ बजे उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार हो गया। बड़े पौत्र कुंदन अग्रवाल ने मुखाग्नि दी।
उनके पौत्र ने बताया कि बीमार होने के बाद उनका उपचार के लिए दिल्ली के डॉक्टर से भी लगातार चल रहा था। निधन की खबर मिलते ही शहर के तमाम उद्यमी मैरिस रोड के भारती नगर स्थित उनके आवास पर पहुंचे और शोक में डूबे परिवार को ढांढस बंधवाया। शाम चार बजे चंदनिया स्थित श्मशान गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर विशाल गर्ग बीडीके, हरिप्रकाश गुप्ता, पुनीत गुप्ता, राज अग्रवाल, एलडी वार्ष्णेय, रोहित नंदन, अनिल देशबंधु, कौशल कुमार आदि मौजूद रहे। बता दें के ओपी अग्रवाल का परिवार देसी घी के पैतृक कारोबार से जुड़ा है। उनका ब्रांड नन्हूमल लगभग 100 वर्ष पुराना हो चुका है। जिसकी आसपास के जनपदों में अपनी अलग पहचान है।
पर्ची ने जीता दिया था चेयरमैन का चुनाव : आशुतोष
अलीगढ़। पूर्व महापौर आशुतोष वार्ष्णेय ने बताया कि वर्ष 1989 में अलीगढ़ नगर पालिका के चेयरमैन पद का आखिरी चुनाव हुआ था। उस वक्त सदन में 40 सभासद थे, दो सभासद शासन से नामित थे। सभासदों के मतों से ही चेयरमैन का चुनाव होता था। जवाहर भवन में हुए मतदान में जफर आलम और ओपी अग्रवाल को बराबर-बराबर 21-21 मत मिले थे। इसके बाद हार जीत का निर्णय करने के लिए पर्ची निकाली गई। पर्ची जफर आलम के नाम से निकली। इसलिए वह चुनाव हार गए और ओपी अग्रवाल विजयी रहे। उस वक्त के नियम के अनुसार जिसके नाम की पर्ची निकलती थी, वह हारा माना जाता था।
उन्होंने बताया कि उस वक्त जफर आलम और ओपी अग्रवाल दोनों निर्दलीय चुनाव लड़े थे। बाद में ओपी अग्रवाल भाजपा में शामिल हो गए थे। वर्ष 1994 तक वह अलीगढ़ नगर पालिका के चेयरमैन बने रहे। नवंबर 1994 में अलीगढ़ नगर निगम का गठन हुआ और एक वर्ष बाद 1995 में मेयर का पहला चुनाव हुआ। जिसमें आशुतोष वार्ष्णेय मेयर चुने गए थे। वर्ष 1989 के नगर पालिका चेयरमैन के चुनाव में सक्रिय रहे वरिष्ठ कांग्रेसी राजेंद्र मेहरा ने बताया कि उस दिलचस्प चुनाव में तत्कालीन अलीगढ़ सांसद ऊषारानी तोमर को भी मतदान करना था, लेकिन वह आ नहीं सकीं थीं।
पत्नी-बेटे का हो चुका है निधन
ओपी अग्रवाल के की पत्नी स्नेहलता अग्रवाल और बेटे संजय अग्रवाल का निधन पहले ही हो चुका है। दोनों के जाने के बाद अब ओपी अग्रवाल के निधन से परिवार गहरा दुख हुआ है। बड़े पौत्र कुंदन अग्रवाल ने मुखाग्नि दी।