सर्दी की शुरुआत के साथ घने कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। ऐसे में किसान फसल बचाने के लिए रतजगा कर रहे हैं। निराश्रित गोवंशों व जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए खेतों पर पहरा दे रहे हैं। मचान व झोपड़ी के जरिए फसल की सुरक्षा कर रहे हैं।
इन दिनों जनपद में खेतों में गेहूं, आलू व लाह (सरसों) के पौधे बढ़ना शुरू हो गए हैं। खैर क्षेत्र में निराश्रित गोवंश व जंगली जानवरों के झुंड फसल बर्बाद करने पर आमादा हैं। स्थानीय किसानों के अनुसार जानवरों का एक झुंडे रात में करीब 20-30 बीघा फसल उजाड़ देता है। ऐसे में फसल को बचाना चुनौती से कम नहीं है। अधिकांश ने तो खेत में मचान व अस्थायी झोंपड़ी डालकर फसल की रखवाली करना शुरू कर दिया है।
खेतों पर लगाईं झटका मशीन व कटीले तार
फसल को जानवरों से बचाने के लिए किसानों ने झटका मशीन व कटीले तार लगाना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर जानवरों का झुंड तारों को तोड़ते हुए खेत में घुस जाता है।
किसानों से बातचीत...
- इन दिनों फसल को जानवरों से रखाना बहुत मुश्किल होता है। हमें खेत पर पहरा व शोर मचाकर पशुओं को भगाना पड़ता है। पूरी रात जागते हुए निकल जाती है। - रामकुमार, निवासी गांव बांकनेर।
- हर साल इस मौसम में अपनी फसल की रखवाली के लिए मचान डालता है। पूरी रात इसी पर ठहर कर जानवरों के झुंड को भगाता हूं। पड़ोस के किसान भी रातभर खेत पर ठहरते हैं। - धर्मपाल, निवासी गांव बिहारीपुर।
फसल को गोवंशों से रखाना चुनौतीपूर्ण है। रातभर झोपड़ी में बैठा रहता हूं। खेत की ओर गोवंशों का झुंड आने पर उन्हें भगाने जाता हूं। पूरी सर्दी इसी तरह से फसल रखानी पड़ती है। - शिवकुमार गौड़, निवासी अंडला।