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Aligarh News: बीमा कंपनियों को चूना लगाने के पांच नए मामले दर्ज

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Archive
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सड़क हादसों के नाम पर बीमा कंपनियों से लाखों रुपये का मुआवजा हासिल करने के कथित फर्जीवाड़े की जांच में नए मामले सामने आए हैं। बीमा कंपनी के जांच अधिकारी की शिकायत पर बन्ना देवी थाने में पांच और मामले दर्ज किए गए हैं। क्वार्सी पुलिस पहले ही गिरोह के सात आरोपियों को जेल भेज चुकी है।
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जांच में देव हॉस्पिटल और महादेव हॉस्पिटल के जरिये कथित तौर पर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराने का मामला सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह पर मामूली विवाद या ऐसे सड़क हादसों में भी लोगों को घायल दिखाकर मुआवजे के लिए दावा दाखिल कराने का आरोप है, जिनमें संबंधित व्यक्तियों को चोट नहीं लगी थी।

आरोप है कि हादसे के दिन ही देव हॉस्पिटल के लेटरहेड पर हाथ से लिखी इंजरी रिपोर्ट तैयार कराई जाती थी। इसके बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे के लिए वाद दायर किया जाता था। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के जांच अधिकारी जीवन पाल डांगी की तहरीर पर दर्ज केस में अस्पताल संचालक सुकुमार यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
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जांच अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री की रिपोर्ट के मुताबिक सुकुमार यादव का कथित मेडिकल पंजीकरण नंबर 1952 यूपी मेडिकल काउंसिल के रिकॉर्ड में नहीं मिला। रिपोर्ट में उसकी एमबीबीएस डिग्री पर भी सवाल उठाए गए हैं। बुलंदशहर पुलिस उसे पहले गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। फिलहाल वह जमानत पर है।

सामने आए अलग-अलग आरोप

वसुधा सिंह के मामले में कार की टक्कर के बाद चोट न मिलने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट बनवाने का आरोप है। अकराबाद के जफरुद्दीन से जुड़े हादसे में अजय और ईशान को भी घायल दिखाया गया। हरदुआगंज के प्रेम कुमार के कैंटर हादसे में टीटू और लोकेश के घायल होने पर सवाल उठे।

क्वार्सी के अनीश के मामले में सूर्यकांत और सुभाष ने चोट न लगने की बात स्वीकार करने की बात जांच में सामने आई। वहीं, अतरौली में ई-रिक्शा हादसे में मुकेश की मौत के बाद साथ बैठे शिव कुमार को चोट न होने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट बनवाने का आरोप है। सीओ सर्वम सिंह ने बताया कि पुलिस इन मामलों में फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और मुआवजे के दावों की जांच कर रही है।
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