मगरमच्छ का मुंह बांधते रेंजर अशोक कुमार।
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अपनी चारपाई के नीचे पांच फिट लंबे मगरमच्छ को देख रविवार रात नानऊ गांव में एक किसान की घिग्घी बंध गई। बाद में हिम्मत जुटा कर शोर मचाया तो गांव वाले आ जुटे। गांव के कुछ युवकों ने हिम्मत दिखाते हुए मगरमच्छ को रस्सी से बांध दिया। सोमवार सुबह गांव पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने मगरमच्छ को सांकरा की गंग नहर में छोड़ दिया।
अलीगढ़ से निकलने पर नानऊ गांव जीटी रोड से बाईं ओर है जबकि हाजरा नहर जीटी रोड से दाईं ओर। गांव से नहर की दूरी करीब 550 मीटर बताई गई है। नानऊ गांव निवासी नंदकिशोर पुत्र हरप्रसाद कुशवाहा ने आबादी से हटकर खेत में अपना मकान बना रखा है।
रात में वह दरवाजे पर चारपाई में सोए थे। नंदकिशोर के अनुसार कुत्तों के लगातार भौंकने पर उनकी नींद खुल गई। उस समय रात के करीब 12 बजे थे। उन्होंने टार्च लगाकर देखा कि कुछ दूरी पर कई कुत्ते उनकी चारपाई की ओर देखकर भौंक रहे थे।
उन्होंने टार्च की रोशनी चारपाई के नीचे की तो मगरमच्छ को देखकर बुरी तरह कांप गए। शोर मचाया तो परिवार के साथ ही गांव वाले भी आ गए। रात में ही ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। सोमवार सुबह रेंजर अशोक कुमार निमेष, वन दरोगा वीरेंद्र सिंह और अवधेश टीम के साथ पहुंचे। इन लोगों ने मगरमच्छ को लाकर सांकरा गंग नहर में छोड़ दिया।