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Fish production: अलीगढ़ ने नौ प्रदेशों में बनाई पहचान, साल में 12 हजार टन मछलियों का उत्पाद

Thu, 04 Jun 2026 05:18 PM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

बड़ी बात ये भी है कि केवल मछली उत्पादन ही नहीं बढ़ा है, इसके स्पॉन (छोटे बच्चों) की आपूर्ति भी कई प्रदेशों में शुरू हो चुकी है। दिल्ली, एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड तक इनकी आपूर्ति हो रही है। लगभग 80 लाख स्पॉन बाहर भेजे गए हैं।
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लोधा स्थित तालाब में पंगेसिया मछली के साथ विवेक - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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मछली उत्पादन में अलीगढ़ ने बड़ी छलांग लगाकर पूरे प्रदेश में 13वां स्थान हासिल कर लिया है, पहले यह 17वें पायदान पर था। सालाना कारोबार 12,346 टन तक पहुंच गया है, जिसका टर्नओवर 180 करोड़ के पार चला गया है। यहां पैदा हो रही पंगेसिया, कतला और रोहू ने पूरे दिल्ली, एनसीआर और आसपास के प्रदेशों में अपनी धाक जमा दी है।

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जिले के 700 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले 900 तालाबों में प्रति हेक्टेयर का उत्पादन तीन से बढ़कर पांच टन तक पहुंच गया है। रोजाना 33 से 34 टन मछली बेची जा रही है। पंगेसिया के साथ अन्य मछलियां भी हैं। जिसमें कॉमन कार्प (गोल्डन) विदेशी मछली है। रोहू को पूरे देश में बहुत चाव से खाया जाता है। कतला तेजी से बढ़ने वाली मछली है। इसके अलावा मिरगल, ग्रास कॉर्प, सिल्वर कॉर्प, कैट फिश, सिंघी, सोल का उत्पादन हो रहा है।

यह मछलियां स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर हैं, इसमें ओमेगा-3, फैटी एसिड और प्रोटीन होता है। पंगेसिया को सिर्फ एक कांटे की वजह से लोग सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इनका भाव भी फिफायती 150 से 160 रुपये किलो तक है। कुल 12,346 टन में सात हजार टन केवल पंगेसिया ही पैदा की गई है।

वर्ष 2025-26 में सालाना उत्पादन 12346 टन तक पहुंच गया है, जिससे लगभग 180 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। बड़ी मात्रा में मछली के छोटे बच्चों का उत्पादन भी हो रहा है, जिसकी आपूर्ति आठ राज्यों तक हो रही है।-डॉ. प्रियंका आर्य, सहायक निदेशक मत्स्य।

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लोधा ब्लॉक के गांव शहरी मदनगढ़ी में हमने पंगेसिया, रोहू, कतला और गोल्डन कॉर्प पैदा की है, पंगेसिया का बीज पैदा करते हैं। अब यह काम कई प्रदेशों में फैल रहा है। इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।-विवेक गौतम, मछली पालक।

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नौ प्रदेशों में जा रहे मछली के स्पॉन
बड़ी बात ये भी है कि केवल मछली उत्पादन ही नहीं बढ़ा है, इसके स्पॉन (छोटे बच्चों) की आपूर्ति भी कई प्रदेशों में शुरू हो चुकी है। दिल्ली, एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड तक इनकी आपूर्ति हो रही है। लगभग 80 लाख स्पॉन बाहर भेजे गए हैं। इनको जिंदा वहां तक पहुंचाने के लिए विशेष ऑक्सीजन बैग का प्रयोग किया जाता है। वर्ष 2022-23 में अलीगढ़ में पहली हेचरी शुरू की गई, जिससे अब ब्रीडिंग हो रही है। यह स्पॉन छह से आठ महीने में एक किलो तक के व्यस्क हो जाते हैं। इससे पहले अलीगढ़ में पंगेसिया मछली के स्पॉन कोलकाता से मंगवाए जाते थे, जो बहुत महंगे पड़ते थे।

तेजी से बढ़ते कदम
1-मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा
और राजस्थान तक भेजे जा रहे स्पॉन
2-आक्सीजन बैग में रखकर जिंदा भेजे जाते, 2025
से पहले कोलकाता से अलीगढ़ मंगवाए जाते थे
3-700 हेक्टेयर क्षेत्रफल के 900 तालाबों में हो रहा
उत्पादन, हर साल बढ़ रहा आंकड़ा

तीन साल में दोगुना हुआ उत्पादन
1-वर्ष 2022-23 में 6912 टन
2-वर्ष 2023-24 में 8864 टन
3-वर्ष 2024-25 में 9464 टन
4-वर्ष 2025-26 में 12346 टन
5-वर्ष 2026-27 का लक्ष्य 18000 टन

इस योजना ने बढ़ाया उत्पादन
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत निजी तालाब निर्माण, गहरा गड्ढा बनाने और रिसर्कुलेटरी सिस्टम बनाने में कुल लागत का 40 से 60 फीसदी तक अनुदान मिलता है। जिससे युवाओं ने इस काम को तेजी से आगे बढ़ाया है।
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