नौ प्रदेशों में जा रहे मछली के स्पॉन
बड़ी बात ये भी है कि केवल मछली उत्पादन ही नहीं बढ़ा है, इसके स्पॉन (छोटे बच्चों) की आपूर्ति भी कई प्रदेशों में शुरू हो चुकी है। दिल्ली, एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड तक इनकी आपूर्ति हो रही है। लगभग 80 लाख स्पॉन बाहर भेजे गए हैं। इनको जिंदा वहां तक पहुंचाने के लिए विशेष ऑक्सीजन बैग का प्रयोग किया जाता है। वर्ष 2022-23 में अलीगढ़ में पहली हेचरी शुरू की गई, जिससे अब ब्रीडिंग हो रही है। यह स्पॉन छह से आठ महीने में एक किलो तक के व्यस्क हो जाते हैं। इससे पहले अलीगढ़ में पंगेसिया मछली के स्पॉन कोलकाता से मंगवाए जाते थे, जो बहुत महंगे पड़ते थे।
तेजी से बढ़ते कदम
1-मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा
और राजस्थान तक भेजे जा रहे स्पॉन
2-आक्सीजन बैग में रखकर जिंदा भेजे जाते, 2025
से पहले कोलकाता से अलीगढ़ मंगवाए जाते थे
3-700 हेक्टेयर क्षेत्रफल के 900 तालाबों में हो रहा
उत्पादन, हर साल बढ़ रहा आंकड़ा
तीन साल में दोगुना हुआ उत्पादन
1-वर्ष 2022-23 में 6912 टन
2-वर्ष 2023-24 में 8864 टन
3-वर्ष 2024-25 में 9464 टन
4-वर्ष 2025-26 में 12346 टन
5-वर्ष 2026-27 का लक्ष्य 18000 टन
इस योजना ने बढ़ाया उत्पादन
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत निजी तालाब निर्माण, गहरा गड्ढा बनाने और रिसर्कुलेटरी सिस्टम बनाने में कुल लागत का 40 से 60 फीसदी तक अनुदान मिलता है। जिससे युवाओं ने इस काम को तेजी से आगे बढ़ाया है।