पहले अम्फन और अब निसर्ग, इन चक्रवात ने अलीगढ़ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य मैदानी इलाके में मानसून की चाल बिगाड़ दी है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं निसर्ग चक्रवात से मैदानी इलाकों में किसी प्रकार की तबाही की तो उम्मीद नहीं है लेकिन इससे मानसून की गति जरूर प्रभावित हुई है। जिस मानसून को पूरी क्षमता के साथ जुलाई महीने में आना था अब अगस्त और सितंबर तक उसका समय विस्तार हो गया है।
प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि अरेबियन सी और बंगाल की खाड़ी से चलकर यह निसर्ग तूफान पूरब से पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि इसका दायरा बहुत बड़ा है इसलिए हिंद महासागर में पश्चिमी तटों पर यह प्रभाव डालेगा। प्रो. अतीक अहमद ने कहा कि मैदानी इलाकों में इसकी हानि पहुंचाने की संभावना इसलिए कम है क्योंकि जब महाराष्ट्र में ही इसकी रफ्तार से 110 किलोमीटर के आसपास है तो मैदानी इलाकों तक आते-आते यह 16 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो जाएगी। इस तरह यहां तक आते-आते यह बहुत कमजोर हो जाएगा। लेकिन मानसून पर यह प्रभाव डाल रहा है। इस समय जो आर्द्रता वातावरण में यह पैदा कर रहा है। यही आर्द्रता जुलाई महीने में अच्छे मानसून की वजह बनती।
निसर्ग चक्रवात के चलते मैदानी इलाकों में बूंदाबांदी और बारिश जरूर हो सकती है। प्रोफेसर कहते हैं इस बार गर्मियों में समुद्र की सतह का तापमान एक डिग्री बड़ा है। यह असाधारण घटना है। इसके चलते हिंद महासागर में डिप्रेशन की स्थिति बनी है। चक्रवात का एक एक बड़ा कारण यह भी है।