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अलीगढ़ : मैरिस रोड की बेशकीमती सरकारी जमीन का बैनामा कराने पर जादौन बिल्डर पर मुकदमा

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मैरिस रोड स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन का चार साल पहले बैनामा और अब निर्माण कराने के मामले में कोल तहसील के लेखपाल ने शहर के नामी जादौन बिल्डर के खिलाफ शुक्रवार देर रात सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि निर्माणाधीन फ्लैट में सरकारी जमीन का इस्तेमाल किया गया है। इतना ही नहीं एडीए ने फ्लैट निर्माण को बिना कोई जांच-पड़ताल किए ही अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया। थाने में दर्ज हुए इस मुकदमे के बाद खलबली मच गई है।
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मैरिस रोड पर आयकर भवन से पहले व एक नामी होटल के सामने कई अरब रुपये के प्रोजेक्ट के तहत जादौन बिल्डर करीब दो साल से यहां फ्लैट का निर्माण करा रहा है। जिस जमीन पर फ्लैट का निर्माण कार्य चल रहा है इसे सरकारी बताते हुए एक व्यक्ति ने जिला प्रशासन से शिकायत की थी। जिला स्तरीय अधिकारियों की जांच टीम ने जादौन बिल्डर का पक्ष जानने के साथ ही तहसील व नगर निगम से जुड़े सरकारी दस्तावेजों व राजस्व अभिलेखों का अवलोकन किया। इसके बाद जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी।
राजस्व अभिलेखों सरकारी दर्ज है जमीन
कोल तहसील के सरकारी अभिलेखों के अनुसार वर्ष 1928 में तत्कालीन म्यूनिसिपल कमिश्नर ने हैदर नाम के व्यक्ति को मैरिस रोड पर 9,000 वर्गमीटर जमीन दी थी। हैदर के बच्चों ने इस जमीन को 2003 में विजय बजाज ग्रुप को बेच दी थी। इसी के पास में 5800 वर्गमीटर सरकारी जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इसी जमीन का भी हैदर के बच्चों ने जादौन बिल्डर के पक्ष में चार साल पहले वर्ष 2018 में बैनामा कर दिया, जबकि जांच में गाटा संख्या 520 का उल्लेख नहीं मिला है।
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लेखपाल ने लिखाया मुकदमा
सिटी मजिस्ट्रेट प्रदीप वर्मा ने बताया कि कोल तहसील के हल्का लेखपाल अवधेश कुमार की ओर से देर रात थाने में धारा 447 व लोकसंपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 व 6 के तहत मेसर्स जादौन इंफोटेक, सुनील कुमार चौहान, अर्जुन सिंह, सुनीता देवी, विजय कुमार सिंह, योगेंद्र पाल सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, प्रमोद कुमार राणा, अशनीत पाल सिंह, परमजीत सिंह, राजेंद्र पाल सिंह समेत 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी गई है। इन पर सरकारी जमीन का बैनामा करा लेने का आरोप है। सिविल लाइंस थाने के प्रभारी निरीक्षक प्रवेश राना ने बताया कि लेखपाल की ओर से 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
कुछ बड़े राजनेता व उद्योगपतियों की है हिस्से दारी
जादौन ग्रुप पर मैरिस रोड के के जिस प्रोजेक्ट को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ है। उस प्रोजेक्ट में शहर का सबसे महंगा फ्लैट बुक किया जा रहा है। साथ में इस प्रोजेक्ट में शहर के कई प्रमुख राजनेता व उद्योगपति भी हिस्सेदार हैं। इस मुकदमे के बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
भाजपा के एक केंद्रीय नेता के रिश्तेदार भी जुड़े हैं संपत्ति से
इस संपत्ति से कुछ साल पहले तक भाजपा के एक केंद्र स्तर के नेता के रिश्तेदारों का नाम भी जुड़ा रहा है। अब यह मुकदमा दर्ज होने के बाद उन केंद्रीय नेता के रिश्तेदारों को लेकर भी शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
जमीन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों को साजिश के तहत गायब करा दिया गया है। उनके पास वर्ष 1926 का बैनामा है। नगर निगम से किसी दूसरे व्यक्ति से उन्होंने बैनामा खरीदा गया। इससे जुड़े सारे दस्तावेज, सीलिंग, एनओसी भी उनके पास सुरक्षित हैं, जबकि जमीन को डीएम के नाम बताया गया है। यह ब्लैकमेलिंग के इरादे से कृत्य किया गया है। यदि कोई मामला था तो कोर्ट यह तय करता। क्या सही है क्या गलत है ? फिर भी कोर्ट को बिना संज्ञान में लाए मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसके खिलाफ कोर्ट में शरण लेंगे।
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- योगेंद्र पाल सिंह बंटी, एमडी जादौन बिल्डर
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