राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय।
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय ने प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर रूपरेखा तैयार कर दी है। बीएड को छोड़कर सभी प्रायोगिक परीक्षाएं 13 जून तक पूरी करनी होंगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कृपांक देने को भी मंजूरी दी गई है।
परीक्षा नियंत्रक धीरेंद्र कुमार ने बताया कि निर्धारित समय के बाद अंक अपलोड करने वाले विद्यार्थी तृतीय दीक्षांत समारोह की मेरिट सूची में शामिल नहीं होंगे। संबंधित महाविद्यालयों पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।
समिति ने यह भी निर्णय लिया कि प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर होने या शीर्षक त्रुटिपूर्ण होने पर पुनः आयोजित परीक्षाओं में विद्यार्थियों को अधिक प्राप्तांक का लाभ मिलेगा। अगर कोई छात्र दोनों परीक्षाओं में शामिल हुआ है, तो बाद की परीक्षा के अंक मान्य होंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं अथवा अन्य आवश्यक कारणों से शीघ्र परिणाम चाहने वाले विद्यार्थी एक हजार रुपये शुल्क जमा कर प्राथमिकता पर अपना परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।
कृपांक और अनियमितताओं पर कार्रवाई
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को अधिकतम चार अंक तक कृपांक दिए जाएंगे। यह सुविधा उन छात्रों के लिए है जो एक से तीन अंकों से अनुत्तीर्ण हुए हों। यह केवल विश्वविद्यालय की बाह्य परीक्षाओं पर लागू होगी। बिना प्रवेश पत्र के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल कराने के मामलों को गंभीरता से लिया गया है। ऐसे विद्यार्थियों का परिणाम अग्रिम आदेशों तक रोका जाएगा। विश्वविद्यालय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।