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पांचवीं बार फिर चौ.बिजेंद्र सिंह पर कांग्रेस ने जताया भरोसा

Sun, 17 Mar 2019 02:25 AM IST
राजेश सिंह अभिषेक शर्मा
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चौ.बिजेंद्र सिंह - फोटो : Amar Ujala
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 अस्सी के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार चौ.चरण सिंह व मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी चौ. राजेंद्र सिंह को चुनाव हराकर जिले की इगलास सीट से पहली बार विधायक बने चौ.बिजेंद्र सिंह पर पांचवीं बार फिर कांग्रेस ने भरोसा जताकर उन्हें टिकट सौंप दी है। पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह व उनकी पत्नी सहित यह उनका 12वां चुनाव होगा। अब तक वह तीन बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं।
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पार्टी से वर्ष 1983 से जुड़े हुए हैं। जाट बाहुल्य इस सीट पर कांग्रेस ने जाट चेहरे के रूप में चौ. बिजेंद्र सिंह को टिकट तो दे दी है, मगर पार्टी के सामने दिक्कत यह है कि महागठबंधन से भी जाट प्रत्याशी चौ. अजित बाल्यान सामने हैं। ऐसे में राह कितनी आसान होगी, यह आने वाला समय बताएगा।



मूल रूप से इगलास विधानसभा के गोंडा ब्लाक के गांव टोंड के रहने वाले चौ. बिजेंद्र सिंह ने वर्ष 1977 में आगरा विश्वविद्यालय के डीएस डिग्री कॉलेज से स्नातक किया और 1980 में नागपुर विद्यापीठ से बीपीएड किया। इसी दौरान कांग्रेस से जुड़कर राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गए और 1983 में यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेंद्र मेहरा की कमेटी में इन्हें ब्लाक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद पार्टी में सक्रिय रहकर यह प्रदेश में महासचिव तक बने। वर्ष 1989 में पहली बार पार्टी ने इन्हें जिले की जाट बाहुल्य इगलास से टिकट दिया और पहली बार में ही चौ.राजेंद्र सिंह जैसे कद्दावर चेहरे को चुनाव हराकर विधायक बने। पार्टी ने इन्हें विधायक रहते ही पहली बार जाट नेता के रूप में वर्ष 1991 में सांसद का चुनाव लड़ाया, मगर शीला गौतम से चुनाव हार गए। इसके बाद वर्ष 1993 में लगातार दूसरी बार विधायक बने। वर्ष 1996 में विधायकी हार गए और 2002 में फिर से विधायकी जीत गए। विधायक रहते 2004 में पार्टी से टिकट मिलने पर सांसदी लड़े और शीला गौतम को हराकर पहली बार सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे।
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इनके सांसद बनने पर इगलास सीट पर 2005 में उपचुनाव हुआ, जिसमें इनकी पत्नी राकेश कुमारी को टिकट मिला, मगर वह मुकुल उपाध्याय से चुनाव हार गईं। फिर 2007 में बिजेंद्र सिंह के राजनीति विरोधी मलखान सिंह की हत्या के बाद हुए चुनाव में इगलास से उनकी पत्नी राकेश कुमारी चुनाव लड़ीं, मगर लहर में यह चुनाव मलखान सिंह की पत्नी विमलेश चौधरी जीत गईं। फिर 2009 में बिजेंद्र सिंह पुन: सांसदी लड़े और 14 हजार वोटों से हारे और 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में उनके 63 हजार वोट आए। इसी बीच 2012 में अतरौली से भी चौ. बिजेंद्र सिंह विधानसभा लड़े, मगर 33 हजार वोट पाकर हार गए। अब पांचवीं बार फिर पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है। वर्तमान में बिजेंद्र सिंह शहर के आईटीआई रोड किशोर नगर में रहते हैं। परिवार में पत्नी के अलावा दो विवाहित बेटियां हैं। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि पिछले तीन दशक से सांसद चुनाव में इनके प्रयास और जाट चेहरा होने के नाते टिकट दिया है।



पार्टी का आदेश है, जनता सेवा के लिए लड़ रहा हूं : बिजेंद्र
पूर्व सांसद व कांग्रेस के घोषित लोकसभा प्रत्याशी चौ. बिजेंद्र सिंह ने कहा है कि अपने अब तक के राजनीतिक जीवन में पेड़ के नीचे बैठकर जनता सेवा करते आया हूं और करता रहूंगा। पार्टी नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया का पहले से आदेश था और क्षेत्र में काम कर रहा हूं। सभी को साथ लेकर चलूंगा। गठबंधन प्रत्याशी तो उद्योगपति हैं। वहां कोई बिरादरी फैक्टर हावी नहीं रहेगा।
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