सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा एवं सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रहकर पूजा-पाठ करती हैं। शाम को शृंगार कर छलनी से पति का दीदार कर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इस पूजा में छलनी का महत्व है। महिलाएं पूजा की थाली सजाते समय बाकी चीजों के साथ छलनी को भी जगह देती हैं। इसी से पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से पानी पीकर व्रत पूरा करती हैं।
कृतिका-रोहिणी नक्षत्र होगा
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदयरंजन शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को कृतिका और रोहिणी नक्षत्र के साथ सिद्धि और व्यतिपात योग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। सिद्धि योग प्रात:काल से लेकर शाम 5: 41 मिनट तक है। इसके बाद से व्यतिपात योग होगा। कृतिका नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 5: 31 मिनट तक है, उसके बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा।
पूजा और अर्घ्य देने का समय
- पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 05:32 से 8:00 बजे तक
- चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय : रात्रि 08:17 बजे से 09:30 तक