फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हैवानियत की हद पार: बेजुबान के पहले दोनों पैर तोड़े, फिर तड़पता छोड़ दिया, दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

Fri, 05 Jun 2026 04:57 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

जीव दया फाउंडेशन और पेटा इंडिया ने मामले को लेकर पुलिस और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की। घायल मादा श्वान का उपचार जारी है और उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार बताया जा रहा है।
विज्ञापन
घायल मादा श्वान - फोटो : स्वयं
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ में गभाना क्षेत्र के पिफलोठ गांव में एक बेजुबान मादा श्वान के साथ क्रूरता का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो लोगों ने उसके साथ मारपीट कर दोनों पिछले पैर तोड़ दिए। गंभीर रूप से घायल हालत में मिली मादा श्वान को उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां उसका ऑपरेशन कराया गया। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

विज्ञापन


जानकारी के अनुसार 13 मई को पिफलोठ गांव में रहने वाली एक सामुदायिक मादा श्वान गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली थी। उसके दोनों पिछले पैरों में फ्रैक्चर था और वह चलने-फिरने में असमर्थ थी। घटना की जानकारी मिलने पर जीव दया फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने उसे उपचार के लिए पशु चिकित्सक के पास पहुंचाया। जांच में दोनों पैरों में गंभीर चोट की पुष्टि हुई, जिसके बाद उसका ऑपरेशन कराया गया।

जीव दया फाउंडेशन और पेटा इंडिया ने मामले को लेकर पुलिस और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की। शिकायत के आधार पर गभाना थाने में बबलू जाटव और पप्पू जाटव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
विज्ञापन


पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बेजुबान जानवरों के साथ इस तरह की हिंसा चिंताजनक है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल घायल मादा श्वान का उपचार जारी है और उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार बताया जा रहा है। स्थानीय थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पशु क्रूरता पर क्या कहता है कानून?

  • पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत जानवरों को अनावश्यक पीड़ा पहुंचाना दंडनीय अपराध है।
  • गंभीर चोट पहुंचाने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।
  • दोष सिद्ध होने पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें