किसी भी पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे उनसे भी आगे निकलें और उनका नाम रोशन करें। यह सपना सच हो जाए तो क्या कहने। कुछ ऐसा ही एसटीएफ के संस्थापक डीएसपी रहे व यूपी के तेजतर्रार आईपीएस अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय के जीवन में हुआ है। उनकी बेटी कृति पांडेय भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) मेें चयनित हो गई हैं। उन्हें आल इंडिया में 426वीं रैंक मिली है।
मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले राजेश पांडेय के दो बच्चों में बड़ी बेटी कृति ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ में ग्रहण की। उन्होंने लखनऊ के लोरेटो मांटेसरी स्कूल से प्रथम श्रेणी में हाईस्कूल आैर लखनऊ के ही सिटी मांटेसरी से प्रथम श्रेणी में इंटरमीडिएट तक शिक्षा ग्रहण की।
इसके बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आईआईटी की और 2015 में मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग में डिप्लोमा किया। कृति अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता की प्रेरणा व माता मीनू पांडेय के सहयोग और अपने अथक परिश्रम को देती हैं। उन्होंने बताया कि पिता के पुलिस सेवा में होने के कारण उनका स्थानांतरण जगह-जगह होता रहा। इसके बावजूद उन्होंने इसका असर उनकी और छोटे भाई आशय की पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया।
उन्होंने सिखाया कि ऊंचा लक्ष्य रखो और कड़ी मेहनत करो। इसी सूत्र वाक्य को अपनाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी दिल्ली के एक कोचिंग से की और इसका नतीजा सामने है। मां ने हमें सुख-दुख में अपने विश्वास को दृढ़ रखकर स्थितियों का सामना करने की शिक्षा दी। बेटी के आईएएस में सफल होने पर एसएसपी राजेश पांडेय के बंगले पर देर शाम तक बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। पुलिस के साथ प्रशासनिक अफसरों और अन्य शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी।
संगीनों के साये में हुई कृति की स्कूलिंग
पिता राजेश पांडेय से बात हुई, तो कृति के बचपन की यादों का जिक्र आते ही उनका मन भर आया। 1986 में बतौर पीपीएस अफसर यूपी पुलिस में शामिल हुए राजेश पांडेय 1997-98 में लखनऊ में सीओ थे। तभी यूपी के कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला गैंग के खात्मे के लिए एसटीएफ का गठन हुआ और वह उसमें संस्थापक डीएसपी शामिल हुए। इसके बाद ताबड़तोड़ एनकाउंटर हुए तो उसमें शामिल पुलिस अफसरों के परिवारों को धमकियां मिलने लगीं। इसके चलते उनके साथ अन्य सभी अफसरों के घरों, बच्चों व परिवारों की सुरक्षा में कमांडो तैनात किए गए। खुद राजेश पांडेय कई दिन तक बच्चों से नहीं मिल पाते थे। 1991 में जन्मी कृति उन दिनों दूसरी या तीसरी कक्षा में रही होंगी। कमांडो सुरक्षा में उनका स्कूल जाना और घर में रहना होता था। एसटीएफ की इसी मेहनत और श्रीप्रकाश शुक्ला आदि के एनकाउंटर पर पिता को चार-चार राष्ट्रपति पदक मिले। 2006 में आईपीएस मिलने पर बेटी ने प्रेरणा ली और पापा का सपना पूरा किया। बता दें कि एसटीएफ की उस संस्थापक टीम के एसएसपी अरुण कुमार (वर्तमान में एडीजी), एएसपी सत्येंद्रवीर सिंह (आईजी से सेवानिवृत्त) और डीएसपी राजेश पांडेय पर अरशद वारसी अभिनीत फिल्म सहर काफी चर्चाओं में रही।