फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ः रंजिशन दो रिश्तेदारों की हत्या में पिता-पुत्र को उम्रकैद

विज्ञापन
विज्ञापन
गोंडा के नगला ढांड़ स्थित डोरीलाल इंटर कॉलेज परिसर में नौ वर्ष पहले मथुरा के दो रिश्तेदार युवकों की हत्या के आरोपी पिता-पुत्र को उम्रकैद व 5.10-5.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे-17 के न्यायाधीश मनोज कुमार सिद्धू की अदालत से सुनाया गया है। यह हत्याएं अपने बेटे की हत्या के बदले में की गई थीं। इस दौरान मृतक दोनों युवकों के परिवार के तीन अन्य सदस्यों ने बचकर जान बचाई थी और उनकी कार को आग के हवाले कर दिया गया था।
विज्ञापन

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जीके सिंघल के अनुसार 13 मई 2012 को भैरई नौझील मथुरा के नरेंद्र कुमार शर्मा की ओर से थाना गोंडा में मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसमें आरोप था कि वह अपने भाई जयवीर, ममेरे भाई राजवीर निवासी भालई सुरीर मथुरा, परिचित ताल नगर गोंडा महेश व एक अन्य डॉ.धीरज संग किसी काम से मथुरा गए थे। वहां से जब वे कार में लौट रहे थे, तभी डोरी लाल इंटर कॉलेज के सामने से गुजरते समय इंटर कॉलेज में बतौर चौकीदार परिवार के साथ रहने वाले हीरपुर गोंडा के रामबाबू ने उन्हें हाथ देकर रोका। चूंकि रामबाबू से कुछ रिश्तेदारी भी है और उनके बेटे की हत्या से जुड़ी रंजिश भी चल रही थी तो हम लोग रुक गए। उन्होंने वादी का हाथ पकड़कर कहा कि चलो अंदर चलकर बैठकर बातें करेंगे। हम सभी लोग अंदर पहुंच गए, जैसे ही हम लोग अंदर पहुंचे तो रामबाबू ने वहां मौजूद अपने तीन बेटों तेजेंद्र, हरेंद्र व पंकज को ललकारते हुए कहा कि देखते क्या हो। आज इन्हें घेरकर मार लो।
इन्होंने तुम्हारे भाई व नाना को मारा है। बस इतना सुनते ही सभी लोग हमलावर हो गए और फायरिंग शुरू कर दी। किसी तरह बचकर हम लोग बाहर दौड़े। मगर जयवीर सिंह व राजवीर सिंह घिर गए। उन्हें घेरकर पीटा व गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में हमलावर हमारे पीछे भागे और हमारी अल्टो कार में आग लगा दी। हम तीनों ने भागकर अपनी जान बचाई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके से रामबाबू व उनके बेटे तेजेंद्र को तमंचों आदि के साथ मौके पर दबोच लिया। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। दौरान-ए-जांच पुलिस ने रामबाबू व तेजेंद्र के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। एडीजे-17 की अदालत में इस मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ। जहां साक्ष्यों व गवाही के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 5.10-5.10 लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया है। साथ में जुर्माने में से 80 फीसद राशि पीड़ित पक्ष को देने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

तो संपत्ति से वसूला जाएगा जुर्माना
एडीजीसी जीके सिंहल के अनुसार न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया है कि पीड़ित पक्ष में मृतकों के उत्तराधिकारियों द्वारा उत्तराधिकारी होने का प्रमाण पत्र देने पर जुर्माने में से 80 फीसद राशि दी जाए। अभियुक्तों के स्तर से अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में उनकी संपत्ति से अर्थदंड वसूला जाए। साथ में अर्थदंड का प्रमाण पत्र जिला मजिस्ट्रेट को जारी किया जाए। ताकि आवेदन पर उसे निर्गत किया जा सके।
रिश्ता तोड़ने से शुरू हुई इन परिवारों में रंजिश
इन दोनों परिवारों से जुड़े लोग, घटना के समय के पुराने जानकार, पुलिस विवेचना और न्यायालय में पेश किए गए तथ्यों/गवाहों पर गौर करें तो ये दोनों परिवार आपस में रिश्तेदार हैं। आरोपी रामबाबू के मृत पक्ष के लोग रिश्ते में मामा-मौसी के भाई लगते हैं। चूंकि पुराना रिश्ता व परिचय था तो रामबाबू का बेटा गुड्डू व इस घटना में मारे गए जयवीर व राजवीर सिलिंडर सप्लाई का व्यापार करते थे। दोनों में व्यापार को लेकर जुगलबंदी थी। इसी परिचय में रामबाबू ने अपनी साली का रिश्ता जयवीर सिंह से कराया था। मगर किन्हीं कारणों से वह रिश्ता टूट गया। इसके बाद 2006 में रामबाबू के ससुर व साली यहां रामबाबू के पास आकर इंटर कॉलेज में रहने लगे। इसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या व साली को जख्मी करने की घटना हुई। जिसमें जयवीर व उसके परिवार पर आरोप लगा। हालांकि बाद में 2010 में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। जिसमें सभी लोग बरी हुए। इसी बीच रामबाबू के बेटे गुड्डू की दिल्ली में हत्या हुई, जिसका अज्ञात में मुकदमा दर्ज हुआ। दौरान-ए-विवेचना उस हत्या में भी जयवीर व राजवीर के नाम प्रकाश में आए। बेटे की हत्या के इसी मुकदमे में गवाही आदि जारी रही। उसी रंजिश में ये हत्याएं हुई थीं।
पहले मढ़ा था आरोपियों ने हमले के बचाव का आरोप
घटना के समय जब पुलिस मौके पर पहुंची तो खुद रामबाबू पक्ष ने यह आरोप लगाया था कि बेटे की हत्या में गवाही रोकने व समझौते की बात न मानने के लिए यह लोग हमारे ऊपर हमलावर होकर आए थे। इसी दौरान पब्लिक की मदद से घेरकर जब बचाव किया तो जवाबी हमले में इनकी मौत हो गई। पब्लिक ने इनकी गाड़ी में आग लगा दी। मगर पुलिस जांच में और जयवीर व राजवीर पर हमले में बचकर निकले तीनों ने गवाही दी तो साफ हुआ कि जब ये लोग कार से निकलकर जा रहे थे तो किसी तरह इनको भनक लग गई थी। इन्होंने हमें रोक लिया और समझौते पर वार्ता के नाम पर अपने साथ अंदर ले गए। जहां हमसे रुपयों की बात रखी। इसी दौरान धोखे में घेरकर मारने के इरादे से हम पर हमला बोला। किसी तरह हम तीन लोग बचकर निकल गए। हमारी गाड़ी में आग लगा दी।
साजिशन हत्या साबित हुआ शूटआउट का प्लान
पुलिस जब मौके पर पहुंची और जांच हुई तो पता चला कि यहां करीब एक दर्जन राउंड से अधिक फायर हुए। मौके पर कई तमंचे व खोखा मिले। मृतकों की कार की चाबी उनकी लाश के पास पड़ी मिली। इसके अलावा जली हुई गाड़ी लॉक की हुई मिली। अगर कोई हत्या के इरादे से आता तो गाड़ी को लॉक कर कॉलेज के अंदर की ओर खड़ा नहीं करता। इन्हीं तमाम तथ्यों के आधार पर पुलिस ने चार्जशीट दायर की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें