इस तरह मजबूर किसानों की गीली मक्का से कमाई धड़ाम हो गई है और उन्हें एमएसपी से 500 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक कम दाम पर उपज बेचनी पड़ रही है। अगर कमाई और लागत के बीच अंतर देखें तो बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी सब खर्च जोड़ने के बाद भी चरन सिंह और उनके जैसे किसानों के लिए खर्च निकाल पाना भी मुश्किल लग रहा है।
एमएसपी पर अपनी फसल बेचने के लिए हम लगातार किसानों में जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे हैं। नमी का एक पैमाना तय है। अगर उससे ज्यादा होती है तो किसानों से पहले नमी सुखाने के लिए कहा जाता है।- मोनिका माहेश्वरी, जिला विपणन अधिकारी
हाइब्रिड मक्का की बढ़ी आवक
मंडी में इस बार हाइब्रिड मक्का की आवक ज्यादा है। अतरौली के किसान महेंद्र प्रताप का कहना है कि हाइब्रिड किस्मों का उत्पादन अधिक होने के कारण बड़ी मात्रा में फसल बाजार में पहुंच रही है। दूसरी ओर देसी मक्का की आवक अपेक्षाकृत कम है। अधिक आवक भी कीमतों पर दबाव बनाने का एक कारण मानी जा रही है।
किसानों की मांग
- एमएसपी पर प्रभावी खरीद शुरू हो
- नमी प्रभावित मक्का के लिए विशेष राहत मिले
- किसानों को भंडारण सुविधा उपलब्ध कराई जाए
- फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाए