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Aligarh News: आलू-टमाटर की खेती पर सब्सिडी, ऑपरेशन ग्रीन योजना से खिले किसानों के चेहरे

Tue, 14 Mar 2023 01:05 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

प्रदेश सरकार ने आलू और टमाटर के भंडारण पर ऑपरेशन ग्रीन योजना में 50 फीसद सब्सिडी देने पर किसानों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं हैं। कोई तो खुश नजर आ रहा है, तो कोई अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है।
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टमाटर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रदेश की योगी सरकार ने आलू और टमाटर के गिरते हुए बाजार भाव से परेशान किसानों को राहत पहुंचाने के लिए ऑपरेशन ग्रीन योजना लागू कर दी है। आलू एवं टमाटर किसानों को भंडारण और भाड़े पर 50 फीसद सब्सिडी देने की घोषणा की गई है। इसको लेकर किसानों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ किसानों का कहना है कि यह सरकार का दिखावा है।

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अगर वाकई में किसानों की चिंता होती तो आलू का समर्थन मूल्य बीते साल की अपेक्षा अधिक होता। सरकार ने आलू क्लस्टर के 17 और टमाटर क्लस्टर के 19 जिलों में इन दोनों फसलों के उत्पादक किसानों, किसान उत्पादक संगठन यानि एफपीओ के अलावा आढ़तियों और अन्य कारोबारियों को भंडारण और ढुलाई भाड़े में आ रही कुल लागत का पचास फीसदी अनुदान दिया जाएगा। व्यक्तिगत किसान और एफपीओ के लिए कम से कम सौ किलोमीटर दूर अपनी उपज ले जाने व अन्य आढ़तियों को ढाई सौ किलोमीटर या इससे अधिक दूर अपनी उपज ले जाने पर ही यह सब्सिडी मिल सकेगी।

सरकार ने आलू की कीमतें 650 प्रति क्विंटल निर्धारित की है। जो फसल की लागत से बेहद कम है। ऐसे में सरकार को आलू की दरों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कर देना चाहिए। -योगेश कुमार शर्मा, रामपुर
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सरकार की ऑपरेशन ग्रीन योजना से कोई खास लाभ नहीं मिलेगा। यह लाभ तभी मिलेगा जब किसान को दूसरे शहरों में आलू या टमाटर लेकर जाना होगा। इसमें देने वाला भाड़ा बेहद कम है। - मुकेश कुमार सिंह, वीरपुरा
सरकार की घोषणा सराहनीय है, लेकिन कहीं भी यह साफ नहीं किया गया है, कि किसानों को किस तरह से लाभ मिलेगा। - धर्मेंद्र कुमार सिंह, बलवंत नगलिया
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ऑपरेशन ग्रीन योजना देखने में तो अच्छी दिख रही है, लेकिन किसानों को इसका कितना लाभ मिलेगा यह देखने वाली बात होगी। - रामगोपाल सिंह, लालपुर


सरकार की घोषणा को लेकर जारी शासनादेश अभी नहीं मिला है। सरकार के निर्देशों का पालन किया जाएगा। जिले भर में आलू किसानों को भंडारण की कोई दिक्कतें नहीं हैं। पहले से ही शीतगृहों में भंडारण की दरें तय हो चुकी हैं। किसी भी किसान को कोई दिक्कत है तो वह संपर्क कर सकता है।
- डॉ. धीरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

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