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Aligarh: बारिश में भीगे, कीचड़ में गिरे, पुलिस की फटकार खाई तब मिली दो बोरी यूरिया, किसानों ने किया हंगामा

Tue, 05 Aug 2025 06:25 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

सुबह से ही बारिश हो रही थी। बारिश में भीगते रहने के बावजूद किसान लाइन में ही डटे रहे। महिलाएं भी अलग लाइन बनाकर खड़ी रहीं। इन किसानों को पांच अथवा दस-दस बोरी की जरूरत थी, लेकिन दो-दो बोरी यूरिया ही मिली।
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यूरिया के लिए अतरौली के पीसीएफ केंद्र पर लगी किसानों की भीड़ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अतरौली में यूरिया के लिए किसानों को कितना परेशान होना पड़ रहा है, इसे शायद ही वह समझ पाएं, जो खेती-बाड़ी नहीं करते। 5 अगस्त को बारिश में भीगने के साथ कीचड़ में गिरते-पड़ते और पुलिस की फटकार खाते हुए लाइन में किसान लगे रहे, ताकि खेतों में खड़ी फसल के लिए यूरिया पा सकें। इतना सब कुछ सहने के बावजूद दो-दो बोरी यूरिया ही उनके हाथ लगी।

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जरूरत के अनुसार यूरिया न मिलने पर पीसीएफ केंद्र और क्षेत्रीय सहकारी समिति में किसानों ने हंगामा भी किया। सूचना पर पहुंचे पुलिस कर्मियों से भी किसानों की नोकझोंक हुई। पुलिस कर्मियों ने उन्हें समझाकर शांत कराया। धान की फसल में यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है। निजी दुकानों में यूरिया नहीं मिल रही। कुछ निजी दुकानों में यूरिया है तो वहां पर प्रति बोरी यूरिया के साथ लगेज में अन्य पदार्थ खरीदने का दबाव है। मंगलवार को अतरौली के पीसीएफ केंद्र और क्षेत्रीय सहकारी समिति में यूरिया पहुंचने की सूचना पर सुबह पांच बजे से ही किसान पहुंचने लगे थे। 
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सुबह से ही बारिश हो रही थी। बारिश में भीगते रहने के बावजूद किसान लाइन में ही डटे रहे। महिलाएं भी अलग लाइन बनाकर खड़ी रहीं। इन किसानों को पांच अथवा दस-दस बोरी की जरूरत थी, लेकिन दो-दो बोरी यूरिया ही मिली। इस पर उन्होंने हंगामा भी किया। सहकारी कर्मियों की सूचना पर पहुंचे पुलिस कर्मियों ने किसानों को लाइन में लगवाकर यूरिया का वितरण करवाया।

जितनी यूरिया थी उसके हिसाब से वितरण किया गया है। आधार कार्ड और खतौनी लेकर प्रति किसान दो बोरी यूरिया दी गई है। -हरीराज सिंह, सचिव
मंगलवार की सुबह पांच से बजे से लाइन में लगना पड़ा। बारिश में भीगे। कीचड़ में गिरने से बचे, तब दो बोरी यूरिया मिल सकी। -राजेंद्र पहाड़गढ़ी
प्रशासन किसानों को यूरिया मुहैया करा पाने में विफल है। जब भी समिति में यूरिया आती है तो लाइन लंबी लाइन में जूझना पड़ता है।- विजेंद्र सिंह, गाजीपुर
निजी दुकानों में यूरिया मिल नहीं पा रही है। किसी दुकान पर है भी तो दुकानदार महंगे दाम पर लगेज खरीदने का दबाव बनाते हैं। - नीरज, हरचंदपुर
घर का काम-काज छोड़कर बारिश में भीगते हुए मंगलवार को सुबह से लाइन में लगना पड़ा। कपड़े भीग गए, तब दो बोरी खाद मिली।- विमलेश, अतरौली
मजदूरी भी नहीं छोड़ी जा सकती, लेकिन घर के पुरुष मजदूरी करने चले गए। मजबूरी में हमें ही यूरिया के लिए लाइन में लगना पड़ा। - संतोष देवी, गांव खेड़ा

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