दिल्ली बॉर्डर पर 13 महीने चले किसान आंदोलन और 736 शहादतों की पांचवीं वर्ष गांठ पर 26 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा, भाकियू, सीटू समेत तमाम किसान-मजदूर संगठनों ने डॉ. अंबेडकर पार्क घंटाघर से कलेक्ट्रेट तक विशाल मार्च निकाला। ट्रैक्टरों और निजी वाहनों से आए हजारों लोगों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
संयुक्त किसान मोर्चा नेता शशिकांत ने कहा कि 9 दिसंबर 2021 को एमएसपी की गारंटी, मुकदमे वापसी और बिजली बिल रद्द करने के वादे किए गए थे, लेकिन सरकार सभी वचनों से मुकर गई। यह किसान-मजदूरों के साथ धोखा है। भाकियू जिला अध्यक्ष सुंदर सिंह बालियान ने 380 दिन की लड़ाई को याद कर फिर से सशक्त आंदोलन की चेतावनी दी। मजदूर नेताओं ने चारों श्रम संहिताओं को मजदूरों पर हमला बताते हुए कहा कि 8 घंटे काम का अधिकार छीनकर कारपोरेट को खुली छूट दे दी गई है। करीब डेढ़ बजे शुरू हुआ पैदल मार्च तस्वीर महल होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा।
अपर जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम संबोधित 16-सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। जिसमें एमएसपी की कानूनी गारंटी, श्रम संहिताएं रद्द करना, कर्जमाफी, मुफ्त बिजली-पेंशन और निजीकरण रोकने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। इस मौके पर अशोक नगोला, वीरेन्द्र अत्री, लवलेश ठाकुर, मंगल सिंह, डी.सी. वार्ष्णेय, मुन्नी लाल उपाध्याय, कृष्णकांत सिंह, सर्वेश सिंह, सत्यवीर सिंह सत्तो, कामरेड ऐहतेशाम बेग, नबाब सिंह, हिना विजारत, मुनेश पाल सिंह, रूपेश कुमार, कैलाश बघेल, विजय पाल सिंह, सुरेश चंद्र गांधी शामिल रहे।