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ये प्यार: बुन्नू की यादें और गुन्नू-गिल्लू से गुलजार है ये परिवार, जींस की जेब में सोना पसंद है इन्हें

Sun, 09 Jul 2023 02:47 AM IST
चमन शर्मा अभिषेक तायल, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

24 सितम्बर 2022 को दो गिलहरी के बच्चे ऊपर छत से नीचे आंगन में आ गिरे। करीब बीस दिन के इन बच्चों की आंख भी पूरी तरह से नहीं खुली थी। इन्हें देख बेटे शिवम को दया आ गई। उनको पालना शुरू कर दिया गया। कुछ ही दिन में दोनों परिवार से घुलमिल गए। इन्हें गुन्नू और बुन्नू नाम दिया गया। 
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विपुल शर्मा के घर में भोजन करते गुन्नू और गिल्लू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अलीगढ़ के गिलहराज मंदिर से चंद कदमों की दूरी पर रहने वाला एक परिवार गिलहरियों का पालनहार बन गया है। गुन्नू, बुन्नू और गिल्लू नाम की गिलहरियों के लिए मामू भांहा इलाके का यह परिवार बहुत खास है। पूरे परिवार को भी इनसे बहुत लगाव हो गया है।

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शर्मीली गिलहरी से प्रेम की यह कहानी अलग है। इनकी फुर्ती और चतुराई का हर कोई दीवाना हो जाता है। विपुल शर्मा एक फार्मा कंपनी में एरिया मैनेजर और उनकी पत्नी ममता शर्मा पोस्ट ऑफिस एजेंट हैं। बेटा इंजीनियर और बेटी एमबीए कर रही है। विपुल बताते हैं कि 24 सितम्बर 2022 को दो गिलहरी के बच्चे ऊपर छत से नीचे आंगन में आ गिरे। करीब बीस दिन के इन बच्चों की आंख भी पूरी तरह से नहीं खुली थी। इन्हें देख बेटे शिवम को दया आ गई। उनको पालना शुरू कर दिया गया। कुछ ही दिन में दोनों परिवार से घुलमिल गए। इन्हें गुन्नू और बुन्नू नाम दिया गया। 
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करीब दस माह बाद बुन्नू की मौत हो गई। जिससे सभी को दुख हुआ। बुन्नू के जाने के 21 दिन बाद एक तीसरी घायल गिलहरी आई, जिसे गिल्लू नाम दिया गया। अब गिल्लू को इस परिवार के साथ रहते हुए करीब 40 दिन हो चुके हैं। परिवार ने आसपास की गिलहरियों के संरक्षण का भी संकल्प लिया है। परिवार का कहना है कि जब ये गिलहरियां उनके कंधे और हाथ पर खेलती हैं तो उन्हें सुखद अनुभूति होती है। 

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गुन्नू-बुन्नू के आने से बढ़ा कारोबार

विपुल शर्मा बताते हैं कि गिलहरियों के आने से उनके घर में सुख- समृद्धि आई है। कारोबार में भी वृद्धि हुई है। वह बताते हैं कि जिस दिन गुन्नू-बुन्नू उनके परिवार में आए थे, उसके तीसरे दिन ही तीस हजार रुपये का लाभ हुआ। इन्हीं रुपयों की एफडी करा दी गई, जिससे उनके खानपान का खर्च चलता है।

मान्यता : शुभ होती है गिलहरी
बैंक कॉलोनी निवासी पंडित परितोष उपाध्याय बताते हैं कि ज्योतिष दृष्टि और सनातन धर्म के परंपरा के अनुसार गिलहरी शुभ मानी जाती है। गिलहरी भगवान राम को प्रिय है। अगर गिलहरी आपके घर में फुदकना शुरू कर दे, तो जल्द ही शुभ समाचार मिलता है। राम सेतु निर्माण के दौरान भी गिलहरी ने वानर सेना के साथ बड़े पत्थरों के बीच छोटी-छोटी कंकड़ी डालकर पुल को मजबूत किया था। जब भगवान राम ने स्नेह से गिलहरी पर हाथ फेरा, तो उऩकी तीन उंगली उस पर छप गई। शहर में अचलताल स्थित हनुमान जी का प्रसिद्ध गिलहराज मंदिर है, जहां मूर्ति का स्वरूप गिलहरी का है।  

रसोई में मांगती है खाना और जींस की जेब में सोना है पसंद 
भूख लगने पर ये गिलहरियां परिवार के सदस्यों को चीं-चीं कर आवाज देती हैं। रसोई में खाना बनाने के दौरान प्लेटफार्म पर बैठ जाती हैं और किसी बच्चे की तरह खाना मांगती हैं। जींस की जेब में सोना इन्हें बहुत पसंद है। विपुल बताते हैं कि उन्होंने इंटरनेट के जरिए गिलहरियों के लालन-पालन की जानकारी ली। ड्रॉपर से उन्हें दूध पिलाकर बड़ा किया। अब वह उनके आंगन में फुदकती हैं। आवाज देने पर दौड़ लगाकर उनके पास आती हैं।
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