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फर्जीवाड़ा : यात्रियों को ढो रहीं दूसरे प्रदेशों की 500 कंडम बसें 

Sun, 09 Sep 2018 12:51 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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डेमो - फोटो : डेमो
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प्राइवेट बसों में यात्रा करने से पहले जान लें, कहीं वह दूसरे प्रदेश से कंडम घोषित बस तो नहीं। अपने राज्य और जिले में यह गोरखधंधा जोरों पर है। केरल, पंजाब और कर्नाटक में कंडम घोषित अथवा दुर्घटना में पूरी तरह डैमेज बसों के रजिस्ट्रेशन नंबर बीमा कंपनियों से खरीद कर इनके आधार पर बस आपरेटर कहीं से भी कंडम या चोरी की बसें औने-पौने दाम पर खरीद लेते हैं।
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फिर आरटीओ में सेटिंग के दम पर स्थानीय रजिस्ट्रेशन नंबर लेकर बेखौफ इन बसों को डेंट-पेंट कराते हैं। इसके बाद बस पूरी तरह वैध हो जाती है। सेटिंग के इस खेल में कई आपरेटर देखते ही देखते करोड़ों के आसामी बन बैठे हैं।

डीएम के आदेश पर एआरटीओ द्वारा की गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। पता चला है कि जनपद में 500 कंडम बसें दूसरे प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबरों के माध्यम से अलीगढ़ से रजिस्ट्रेशन के जरिये संचालित की जा रही हैं। दूसरे प्रदेशों की बीमा कंपनियों ने कंडम व एक्सीडेंट में पूरी तरह डैमेज हुई बसों के रजिस्ट्रेशन नंबर बेचने का धंधा बना रखा है।
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इन रजिस्ट्रेशन नंबरों की निजी बस आपरेटरों से मुंहमांगी कीमत वसूली जाती है। इस गोरखधंधे का पता चलने पर डीएम ने सभी बाहरी प्रदेशों से खरीदी गई बसों के रजिस्ट्रेेशन नंबरों का चिन्हांकन कराया। इसके बाद डीएम ने आरटीओ को दूसरे प्रदेशों के आरटीओ कार्यालय से संपर्क कर इन सभी बसों के मूल रजिस्ट्रेशन नंबर निकलवाने के आदेश दिए हैं।

इसके बाद आपरेटरों से संचालित बसों की खरीद के स्रोत के मामले में पूछताछ करने को कहा है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमुक बस चोरी की है अथवा कंडम घोषित या अन्य माध्यमों से उसकी खरीद हुई है। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि उपरोक्त बसों में से कोई चोरी अथवा कंडम घोषित पाई गई तो संबंधित आपरेटर को बख्शा नहीं जाएगा। 

इस गोरखधंधे से रातोंरात करोड़पति हो गए कई आपरेटर 
 महानगर में करीब दो हजार प्राइवेट बसें विभिन्न रूटों पर संचालित हैं। इनमें से अधिकांश देहाती इलाकों में चलती हैं। करीब 300 आपरेटर इनसे जुड़े हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई पिछले पांच-सात वर्षों में रातों-रात करोड़पति की श्रेणी में पहुंच गए हैं। अब कंडम बसों के खेल का खुलासा होने के बाद इनके धनपति बनने का राजफाश होने के आसार हैं। 

रोजाना हजारों यात्रियों को ढोती हैं ये बसें 
 जनपद के ग्रामीण इलाकों में कई इलाके ऐसे हैं जहां रोडवेज बसों की कनेक्टिविटी नहीं है। बताया यह भी जाता है कि प्राइवेट बस आपरेटरों की यूनियन का काकस इतना ताकतवर है कि वे रोडवेज अफसरों पर हावी है। कई सफेदपोशों का वरदहस्त होने के कारण यह लोग दबंगई से तमाम रूटों पर रोडवेज बस चलने ही नहीं देते। फलस्वरूप इन इलाकों के क्या छात्र-छात्राएं, क्या व्यापारी, किसान यहां तक कि सरकारी एवं प्राइवेट कर्मचारी भी इन बसों से यात्रा पर मजबूर होते हैं।  
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