क्वार्सी बाईपास स्थित अपार्टमेंट का फोटाे
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अलीगढ़ शहर के मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए अपने घर का सपना पूरा करना अब और भी आसान हो जाएगा। प्रशासन द्वारा आदर्श कास्टिंग गाइडलाइन-2025 को मंजूरी मिल गई है। इसके लागू करने के बाद प्लॉट और मकानों की कीमतों में बड़ी कटौती होने जा रही है
नई व्यवस्था के तहत अब संपत्तियों के दाम अनुमान के बजाय वास्तविक लागत के आधार पर तय किए जाएंगे। शुक्रवार को कमिश्नर सभागार में हुई बोर्ड बैठक में गाइडलाइन को मंजूरी दी गई थी। अब तक सरकारी आवासीय योजनाओं में आकस्मिक निधि (कंटीन्जेंसी) और ओवरहेड चार्ज के नाम पर प्रॉपर्टी की मूल कीमत में 30 फीसदी तक अतिरिक्त राशि जोड़ दी जाती थी। नई नीति ने इस पर कैंची चला दी है।
अब सभी श्रेणियों के लिए अधिकतम चार्ज घटाकर 16 फीसदी कर दिया गया है। जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए यह चार्ज मात्र 14 फीसदी होगा। निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए अतिरिक्त चार्ज 15 फीसदी तय किया गया है। इस कटौती का सीधा मतलब है कि मकान की कुल कीमत में लाखों रुपयों की बचत होगी।
पिछले दिनों एडीए की बोर्ड बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों पर मुहर लगी थी। मंडलायुक्त संगीता सिंह के मुताबिक इसी बैठक में आदर्श कास्टिंग गाइडलाइन-2025 को मंजूरी दी गई। यह नई गाइडलाइन पारदर्शी है। लागत आधारित मूल्य निर्धारण से अवैध कॉलोनियों पर लगाम लगेगी और लोगों को नियोजित क्षेत्रों में सस्ते दाम पर आशियाना मिलेगा।
संपत्तियों पर डिस्काउंट
नई नीति सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि देश के रक्षकों के लिए भी खास है। सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भुगतान की शर्तों में विशेष छूट दी जाएगी। ऐसी संपत्तियां जो काफी समय से नहीं बिक पा रही हैं, उनके दामों में भी कटौती करने का प्रावधान किया गया है, ताकि आवासीय बाजार को नई गति मिल सके। जानकारों का मानना है कि पहले ओवरहेड चार्ज के कारण सरकारी प्रोजेक्ट्स भी महंगे हो जाते थे, जिससे लोग निजी डेवलपर्स की ओर रुख करते थे। अब सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और कम कीमतों के कारण मध्यम वर्ग का भरोसा लौटेगा और अलीगढ़ के रियल एस्टेट सेक्टर में उछाल आएगा।