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लोगों को ठगता घूम रहा फर्जी दरोगा गिरफ्तार

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पुलिस की गिरफ्तर में फर्जी दरोगा। - फोटो : CITY OFFICE
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वर्दी पहनकर और कंधे पर दो-दो सितारे लगाकर लोगों को ठग रहे फर्जी दरोगा को गांधीपार्क पुलिस ने मंगलवार की रात गिरफ्तार किया है। उसके पास से दो वर्दी और चार स्टार के अलावा पुलिस से जुड़े कामकाजी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने जिस बुलेट पर उसे दबोचा, उस पर भी आगे व पीछे पुलिस लिखा था। जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अदालत के आदेश पर उसे जेल भेजा गया है।
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एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत ने बताया कि पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कोई व्यक्ति दरोगा बनकर घूम रहा है और लोगों से काम कराने के नाम पर रुपये ऐंठता रहा है। उसका सर्वाधिक कार्य क्षेत्र धनीपुर है। इस पर गांधीपार्क पुलिस ने रेकी शुरू की। इसी बीच मंगलवार रात इंस्पेक्टर गांधीपार्क हरिभान सिंह राठौर ने बौनेर की ओर जाते समय बुलेट बाइक नंबर यूपी-16 बीएच/4748 पर सवार दरोगा वर्दीधारी व्यक्ति को घेरकर रोक लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम विनोद कुमार पुत्र सोनपाल सिंह निवासी दानगढ़ थाना डिबाई बुलंदशहर बताया।
थाने लाकर हुई पूछताछ व तलाशी में उसके पास बुलेट के अलावा बुलेट की डिग्गी में दो वर्दी, चार पीतल के स्टार, पीकैप के अलावा एक डायरी में कुछ घटनास्थल के नक्शे, एफआईआर कॉपी व अन्य पुलिस के कोर्ट संबंधी कामकाजी दस्तावेज मिले। साथ में उसी के नाम से तीन एटीएम कार्ड, दो आधार कार्ड, दो पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, दो मोबाइल, दो सिम कार्ड अलग से बरामद हुए। आधार व पैन कार्ड पर अलग-अलग पते अंकित थे। पूछताछ में उसने स्वीकारा कि वह 2015 की दरोगा भर्ती परीक्षा में फेल हो गया था। इसके बाद 2016 में उसने फर्जी दरोगा बनकर लोगों को ठगना व रौब गालिब करना शुरू कर दिया। लोगों से काम कराने के नाम पर रकम ऐंठता था। अक्सर वह स्वयं को दूसरे जिलों में या एसटीएफ में तैनाती बनाकर यहां काम कराने के नाम पर रुपये लेता था। एसपी सिटी के अनुसार इस मामले में आरोपी विनोद के खिलाफ धोखाधड़ी संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है।
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दरोगा बताकर की शादी... पत्नी को कभी न ले गया साथ
महानगर की गांधीपार्क पुलिस द्वारा पकड़ा गया फर्जी दरोगा बाहर की बात तो छोड़ो घर में भी फर्जीवाड़ा किए बैठा था। उसने 2018 में सासनी गेट इलाके की युवती से खुद को दरोगा बताकर ही शादी की थी। सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत युवती का पिता भी उसके झांसे में आ गया। पर आज तक वह अपनी पत्नी को अपनी तैनाती बताने वाले जिले में नहीं ले गया। हालांकि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी को उस पर शक हो गया था। मगर वह चुप रहती थी।
एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत ने बताया कि युवक के पिता की 2016 में मौत हुई। उसके बाद उसने घर से पैर निकाल दिया और 2017 में जाकर गांव के अलावा क्षेत्र में वह दरोगा के रूप में पहचाना जाने लगा। अपनी पोस्टिंग वह कभी आगरा, कभी कानपुर, कभी बस्ती तो कभी एसटीएफ में बताता। कभी यह बताता कि इन दिनों जीआरपी में तैनात है। जब उसकी 2018 में सासनी गेट इलाके से शादी हो गई तो उसका ज्यादातर समय अलीगढ़ ही बीतने लगा। पत्नी को उस समय शक होना शुरू हो गया, तब उसे समय पर वेतन नहीं मिलता था। वह तरह-तरह के बहाने बनाने लगता था। हर बार किसी न किसी वजह से उसका वेतन देरी से आता था। घर में भी दिक्कत होने लगी थी। एक बेटा भी पैदा हो गया।
वह यहां दरोगाओं व सिपाहियों के बीच मिलना जुलना रखता था। साथ में स्टेशन पर भी आना-जाना रखता था। कहता था कि छुट्टी पर आया हुआ है। पुलिस के बीच उठना-बैठना देख और वर्दी पहने होने के कारण लोग उसे काम भी देने लगे। पुलिस जांच के अनुसार ताजा समय में धनीपुर क्षेत्र में उसने दस से पंद्रह लोगों को चूना लगाया। इसी तरह की शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं कि विनोद नाम के फलां दरोगा ने काम कराने के नाम पर रुपये ले लिए हैं। इस पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि वह फर्जी है।
पकड़े जाने पर नहीं बता सका पीएनओ
पुलिस में हर कर्मचारी का एक पीएनओ नंबर होता है। वह नंबर पहली ज्वाइनिंग के समय ही मिलता है और आजीवन रहता है। मंगलवार रात इंस्पेक्टर हरिभान सिंह राठौर ने जब उसे रोका तो वह वर्दी पहने हुए था और जब उससे पीएनओ नंबर पूछा तो वह नंबर नहीं बता सका। इस पर इंस्पेक्टर ने तल्ख लहजे में उसे गाड़ी में बैठाकर थाने पहुंचाया।
खुद की बताई अलीगढ़ जीआरपी की दनकौर चौकी पर तैनाती
अलीगढ़। जिस समय फर्जी दरोगा विनोद को पकड़ा गया तो उस पर पीएनओ नंबर न बता पाने पर ही संदेह हो गया। मगर उसने फिर भी पुलिस को यह कहकर रौब में लेने का प्रयास किया कि उसकी अलीगढ़ जंक्शन जीआरपी थाने की दनकौर चौकी पर तैनाती है। इस पर इंस्पेक्टर ने तत्काल जीआरपी इंस्पेक्टर से बात की और उसका फोटो खींचकर भेजा तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
खुद को बताता था विकास दुबे पर एसआईटी का सदस्य
अलीगढ़। पुलिस महकमे में जब उसकी गिरफ्तारी की खबर फैली और पुलिस के सोशल मीडिया ग्रुप पर उसका फोटो वायरल होना शुरू हुआ तो वे पुलिसकर्मी दंग रह गए, जिन्हें वह खुद को कानपुर के विकास दुबे से जुड़ी एसआईटी का सदस्य बताता था। वह कहता था कि शासन से गठित एसआईटी में उसे बतौर सदस्य जांच में जिम्मेदारी मिली हुई है।
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