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किशोर उम्र में फेक कॉल.. पुलिस बनी मजबूर

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अभिषेक शर्मा
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टिनएज साइबर अपराधियों की हरकतें अक्सर पुलिस के लिए मजबूरी का सबब बन जाती हैं। साइबर सेल तक पहुंच रहीं फेक कॉल की शिकायतों में अधिकांश शिकायतें ऐसी हैं, जिनमें पुलिस पहुंचती है तो सामने आरोपी नाबालिग का होता है और नासमझी में यह अपराध कर जाता है। जब पुलिस के सामने वह पड़ता है तो अपराध बोध होने पर माफी सबसे बड़ा सुरक्षा कवच उसके सामने होता है। ऐसे में पुलिस के पास इन्हें डांट-डपट कर छोड़ने के सिवाय दूसरा कोई चारा नहीं होता। मुख्यमंत्री व डीजीपी तक पहुंच रही इन शिकायतों ने लगातार हाईटेक हो रही पुलिस की साइबर व सर्विलांस सेल की सिरदर्दी बढ़ा दी है। वहीं साइबर क्राइम के इस चलन ने समाज में महिलाओं की भी परेशानियां बढ़ा रखी हैं। अक्सर शर्म के कारण वह किसी को बता भी नहीं पाती और छुपाना भी उनके लिए कभी कभी गले की हड्डी साबित हो जाता है।

पिछले सप्ताह एक ऐसा ही मामला सामने आया। महानगर के एक नामी चिकित्सक की उम्र के करीब चार दशक पार कर चुकी पत्नी के मोबाइल पर फोन आया और फोनकर्ता ने उनसे बेवजह बतियाना शुरू कर दिया। इससे वह हतप्रभ रह गई। उन्होंने पहले फोनकर्ता को डांट फटकार कर तमाम नसीहतें दे डाली। न मानने पर अपने चिकित्सक पति को जानकारी दी। उन्होंने भी फोनकर्ता को डांटा, परंतु वह फिर भी न माना और उनसे बदतमीजी कर डाली। हार कर उन्हाेंने पुलिस को जानकारी दी। हरकत में आई सर्विलांस सेल ने पड़ताल की तो यह कृत्य करने वाला मेरठ का एक 14 वर्षीय संभ्रांत परिवार का किशोर पकड़ में आया। दो दिन पहले उसे अलीगढ़ लाकर एसएसपी के समक्ष पेश किया गया। उसकी उम्र को देखते हुए पुलिस ही नहीं चिकित्सक परिवार भी हैरान रह गया। बाद में आरोपी को डांट फटकार कर व नसीहत देकर छोड़ दिया गया। सूत्र बताते हैं कि फेक कॉल के अधिकांश प्रकरणों में परिणाम कुछ इसी तरह होता है।
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ट्विटर-फेसबुक सेल गठित
साइबर क्राइम से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस ने पिछले सप्ताह एक ट्विटर-फेसबुक सेल का गठन किया है। सब इंस्पेक्टर केके सिंह को इसका प्रभारी बनाया है। इस सेल का दायित्व है कि ट्विटर व फेसबुक पर डीजीपी व सीएम स्तर तक पहुंचने वाली अलीगढ़ से संबंधित शिकायतों का को-आर्डिनेशन करेंगे। उनमें कार्रवाई, प्रगति आदि कराएंगे और इसकी रिपोर्ट एसएसपी को देंगे।

महिला आवाज सुन करने लगते बात
डॉक्टर दंपति से जुड़े प्रकरण के साथ साथ इस तरह के प्रकरणों में यह तथ्य सामने आता है कि आरोपी बेवजह अपने फोन से शरारती अंदाज में नए-नए नंबर मिला रहा होता है। अचानक किसी कॉल पर महिला की आवाज सुनने को मिलती है तो वह उससे बातचीत शुरू करने की कोशिश करता है। मगर उसे यह अंदाजा नहीं होता कि सामने वाला कौन और किस उम्र का है।
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फेक कॉल संबंधी शिकायतें दो तरह की होती हैं। एक तो कोई परिचित आपको जानबूझकर नए नंबर से परेशान कर रहा है। उसका मकसद होता है। दूसरा अंजान व्यक्ति कर रहा है और उसका कोई मकसद नहीं, बस यूं ही। इस तरह की शिकायतों में कम उम्र अंजान आरोपी सामने आते हैं। जिन्हें मजबूरी में डांट डपटकर भविष्य की हिदायत देकर छोड़ा जाता है। ऐसा हर मामले में नहीं होता। प्रकरण की गंभीरता और मायने के आधार पर निर्णय लिया जाता है। डॉक्टर प्रकरण कुछ इसी तरह का था। - राजेश पांडेय , एसएसपी
 
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