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दहशतगर्दों की पनाहगाह में रची साजिश, क्लू की तलाश

Sat, 04 Feb 2017 01:46 AM IST
अमित शर्मा
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Extremists plot hatched in a hatchery, seek clues - फोटो : Amar Ujala
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देश की खुफिया एजेंसियों की नजर में दहशतगर्दों की पनाहगाह के रूप में कुख्यात अपने जिले में पहली बार हिला देने वाली साजिश रची गई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अधिकारी सीधे-सीधे कहने से बच रहे हैं। मगर उस क्लू की तलाश जोरों से शुरू हो गई है,
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जिसकी मदद से साजिशकर्ताओं तक पहुंचा जा सके। देश के सबसे महत्वपूर्ण दिल्ली-हावड़ा ट्रैक पर सोमना स्टेशन-दौरऊ क्रासिंग के मध्य बृहस्पतिवार रात जो हुआ, उसकी खबर पर खुद एसएसपी भी जांच के लिए मौके पर पहुंचे। इस दौरान तथ्यों, बयानों व घटनास्थल के हालात का बारीकी से अध्ययन किया।
इसके बाद जांच की बात कही जा रही है। कानपुर के रेल हादसों सरीखी मॉडस अपरेंडी ने सभी के कान खड़े कर दिए हैं, क्योंकि वहां आईएसआई का हाथ उजागर हुआ था। शुक्रवार देर रात से रेलवे ट्रैक की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 
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सिम खोजने के लिए खुदाई का तर्क नकारा
घटनास्थल पर जब एसएसपी राजेश पांडेय पहुंचे तो उन्हें बातचीत में बताया कि रात में सात लोग गश्ती ट्रैक मैनों को देखकर भाग गए थे। इसके बाद यहां सुबह एक युवक खड़ा दिखाई दिया था। उसे जब टोका तो यही जवाब मिला उसका सिम गिर गया है।
बाद में वह भाग गया था। मगर खुद एसएसपी ने इस तर्क को नकार दिया कि यहां कोई सिम खोजने के लिए गड्ढा नहीं कर सकता। इसके बाद पता चला कि आसपास दूर तक न कोई आबादी है। पास में गंगा परियोजना का काम जरूर चल रहा है। मगर वहां भी मजदूर नहीं थे। इसलिए यह तथ्य नकार दिया गया।
डिवाइस लगानी थी तो खोदा क्यों
जांच के दौरान खुद पुलिस व जांच अधिकारी यह सवाल दाग रहे हैं कि अगर यहां खुराफातियों को कोई डिवाइस ट्रैक में फिट करनी थी तो खोदा क्यों। वह ऐसे ही पटरी के बराबर में डिवाइस लगा सकते थे। मगर तर्क दिया जा रहा है कि पटरी में स्पेस होने पर ट्रेन हादसा हो सकता है। इसलिए ऐसा किया गया होगा।
एजेंसियां भी हर इनपुट खंगालने में लगीं
खुफिया एजेंसियां इस साजिश को आतंकी साजिश मानने से इंकार नहीं कर रहीं। मगर इस साजिश को लेकर हैरान भी हैं। तर्क है कि अक्सर वारदात करने के बाद अलीगढ़ आतंकियों की शरणस्थली तो रहा है, मगर आज तक यहां साजिश नहीं रची गई।
आखिर साजिशकर्ता वास्तव में इस वारदात कोे अंजाम देना चाहते थे या फिर  उनका मंसूबा किसी तरफ इशारा करने का है। इस सवाल का जवाब तलाशा जा रहा है। वैसे यह अलीगढ़ में आतंकी गतिविधियों पर गौर करें तो यहां सिमी की स्थापना हुई। कश्मीर से आई कपड़ों की गांठ में मेडिकल रोड पर एके  47 तक बरामद हुई। कई बड़ी वारदातों के बाद आतंकियों के अलीगढ़ में छिपने व ठहरने के सबूत अक्सर खुफिया एजेंसियों को मिलते रहे हैं।
मगर वारदात नहीं हुई। इस बार जो हुआ, वह सभी के लिए नया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे लेकर अभी ठोस वजह नहीं तलाश पा रही।  वहां की घटना में जो कुछ देखा गया, उससे इसकी भी आशंका है कि इसे स्लीपर सैल से अंजाम तो नहीं दिलवाया गया है। अब सवाल यह है कि जब अब तक अलीगढ़ में आतंकी वारदात को अंजाम नहीं दिया  गया तो फिर यहां यह कोशिश क्यों की गई। आखिर इसके पीछे क्या मकसद है। क्या इसका मकसद कानपुर की तर्ज पर मोदी की सभा से पहले दहशत फैलाना था। या यह किसी की खुराफात है। या किसी बड़ी वारदात से पहले एजेंसियों का ध्यान बाटने की कोशिश हुई है।

निश्चित तौर पर यह घटनाक्रम संदेहास्पद तो है। मगर जब तक जांच नहीं हो जाती, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। हो सकता है कि यह किसी की शरारत हो। फिर भी हर स्तर पर गंभीरता से जांच कराई जा रही है।
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-राजेश पांडेय, एसएसपी 
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