बारिश का कई करोड़ लीटर पानी यूं ही बहकर व्यर्थ हो जाता है, लेकिन इस बार बड़े पैमाने पर बारिश के पानी को संरक्षित करने की तैयारी की जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत मनरेगा से जिले की 867 ग्राम पंचायतों में बने तालाबों को संरक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही 100 ग्राम पंचायतों में बारिश से पहले नये तालाबों की खुदाई कराने की तैयारी कर ली है। जिले में विलुप्त हो रहीं नीम, सेेंगर, सिरसा, करबन व रुतवा नदी को अतिक्रमण से मुक्त कराकर उनकी खुदाई करायी जाएगी। इसके लिए प्रशासनिक एवं विकास विभाग के अधिकारियों ने खाका तैयार कर लिया है।
इन नदियों का होगा उद्धार
अतरौली तहसील के मलहपुर गांव से प्रवेश करने वाली नीम नदी कनकपुर, पनेहरा, नगला बंजारा, खड़ौआ, आलमपुर, जिरौली होते हुए कासगंज जिले में प्रवेश करती है। जिले में इस नदी की लंबाई करीब 40 किलोमीटर और चौड़ाई 50 से लेकर 100 मीटर तक थी। लेकिन समय के साथ - साथ लोगों ने इस पर कब्जा कर लिया। करीब दो दशक पहले नीम नदी के प्रवाह से दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को फायदा होता था। यहां के लोग नदी के किनारे पर स्नान करने के साथ - साथ पश ु - पक्षी के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी करते थे । मगर, इन गांवों में ी नदी की जमीन पर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं । कुछ स्थानों पर तो लोगों ने नदी को धीरे - धीरे अपने खेतों में भी शामिल कर लिया। जिसके कारण नदी का अस्तित्व ही खत्म हो गया। हालांकि प्रशासन नीम नदी को कब्जा मुक्त कराने के साथ - साथ मनरेगा में दो साल से खुदाई का करा रहा है। इसके अलावा सेंगर, सिरसा, करबन व रुतबा नदी का संरक्षण करने के लिए मनरेगा, लघु सिंचाई, वन तथा जिला पंचायत के माध्यम से कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
बारिश से पहले बनेंगे तालाब
अमृत सरोवर योजना में जिले के प्रत्येक ब्लॉक की बड़ी पंचायतों में तालाब बनाए जाएंगे। इसके लिए भूमि का सर्वे शुरू हो गया है। भूमि चिन्हित होने के बाद कार्ययोजना तैयार होगी। शासन ने भूजल स्तर को गिरने से रोकने को अमृत सरोवर योजना शुरू की है। तय हुआ है कि जिन गांव पंचायतों में तालाब निर्माण के लिए एक एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध होगी, उसी ग्राम पंचायत में सरोवर का निर्माण होगा। इसके लिए राजस्व व विकास विभाग की टीमें जमीनों की तलाश में जुटी हुई हैं।
पुराने तालाबों पर कब्जे, नहीं भरा पानी
प्रशासन भले ही जिले में नये तालाब बनाने की योजना बना रहा है, लेकिन 200 से अधिक ऐसे तालाब है, जहां अवैध अतिक्रमण के चलते वे अस्तित्व विहीन हो चुके हैं। कई तालाबों में सफाई नहीं हुई है और भीषण गर्मी और डीएम के आदेशों के बाद भी अब तक पानी नहीं भरा जा सका है। इससे पशुओं के लिए पेयजल का संकट पैदा हो रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले में मनरेगा योजना से विलुप्त हो रहे तालाबों व नदियों का जीवन बचाने को उनकी खुदाई, सुंदरीकरण आदि का वृहद स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षण कर कार्ययोजना तैयार की जा रहा है। बारिश से पहले ही इन्हें तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया है।
- अंकित खंडेलवाल, सीडीओ