पत्रकारों से वार्ता करते ओलंपियन अशोक ध्यानचंद,
- फोटो : Amar Ujala
हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बेटे ओलंपियन अशोक कुमार ध्यानचंद ने कहा कि मेजर ध्यानचंद को अब तक भारत रत्न न दिए जाने को लेकर खुद भी उलझन में हूं। आखिर उन्हें भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया। न देने की कोई एक वजह तो बताई जाए?
शनिवार को अशोक कुमार ने अमर उजाला से खास बातचीत की। वे यहां डीएस कॉलेज में अखिल भारतीय आमंत्रण महिला हॉकी प्रतियोगिता में शामिल होने आए हैं। प्रतियोगिता रविवार से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि ध्यानचंद अगर भारत रत्न के हकदार नहीं हैं, ऐसा कोई कहे तो। क्या उनमें काबिलियत नहीं। देश का नाम नहीं चमकाया। भारत रत्न न देने के लिए कारण तो देशवासियों के सामने लाया जाए।
ओलंपियन अशोक ने कहा कि पहले हॉकी की आत्मा थी और अब हॉकी का शरीर है। बहुत फर्क आया पहले और अब की हॉकी में, खासतौर से तकनीक पक्ष में। इसे विडंबना नहीं तो क्या कहेंगे देशभर में कुल 30-40 मैदान हैं, जो खेलने के लायक है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले यूपी से ही 7-8 खिलाड़ी टीम इंडिया में होते थे, लेकिन इसमें लगातार गिरावट आ रही है। वह खुद 70-80 के दशक में यूपी से अकेले खिलाड़ी टीम इंडिया में थे। हॉकी के उत्थान में सबसे ज्यादा रोड़ा एकेडमी हैं। इन्होंने हॉकी को कब्जे में कर रखा है। पहले हॉस्टल में खिलाड़ी बनाए जाते थे। मैनेजमेंट काम करता था, जो अब ऐसा नहीं है। यूपी के लड़कों में काफी क्षमताएं हैं। उन्होंने कहा कि हमारी शैली को अपनाकर यूरोपियन टीमें आगे बढ़ रही हैं, जबकि हम उनकी शैली अपनाने में लगे हैं। असल हॉकी तो घास के मैदान पर दिखती है, इससे ही ध्यानचंद जैसे जादूगर निकले हैं, एस्ट्रोटर्फ पर नहीं।