परीक्षा केंद्रों पर औसत आयु से अधिक के परीक्षार्थी परीक्षा देते हुए पाए जाने पर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की ओर से 20 स्कूलों को फर्जी परीक्षा फॉर्म भरवाने का दोषी मानते हुए नोटिस दिया गया है। इसके लिए अब डीआईओएस कार्यालय पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अखंड भारत हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक शर्मा आजाद ने कहा कि परीक्षा फॉर्म देने से पहले स्कूलों का भौतिक सत्यापन होता है। नियमानुसार अधिकारियों की टीम को स्कूलों में पहुंचकर भौतिक सत्यापन के जरिये पता लगाना होता है कि स्कूल बताई गई जगह पर संचालित है या नहीं। स्कूल में रेगुलर पढ़ रहे छात्रों की संख्या कितनी है? स्कूल में फर्नीचर, छात्रों व स्टाफ का हाजिरी रजिस्टर, पिछली कक्षाओं का रिकार्ड व अन्य सुविधाएं आदि भी देखी जाती हैं। लेकिन डीआईओएस कार्यालय द्वारा दिए गए नोटिस की मानें तो यह स्कूल गलत तरीके से परीक्षा फॉर्म भरने में सफल रहे। अब सवाल उठता है कि क्या अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूलों के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट देकर परीक्षा फॉर्म स्कूलों को मिले या फिर बिना भौतिक सत्यापन के ही परीक्षा फॉर्म स्कूलों को बांट दिए गए। वजह जो भी हो, सवालों के घेरे में डीआईओएस कार्यालय भी है। इसकी भी जांच होनी चाहिए। इस संलिप्तता की मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी।
- यह खेल विभाग की संलिप्तता के बिना नहीं चल सकता। स्कूलों में परीक्षा फॉर्म देने से पहले किन अधिकारियों की टीम भौतिक सत्यापन में लगाई गई थी। उन अधिकारियों को भी नोटिस दिए जाएं। यदि भौतिक सत्यापन नहीं किया तो विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। अकेले स्कूल प्रबंधक ही इस खेल में नहीं है, अधिकारी कर्मचारियों के संरक्षण में यह गोरखधंधा चलता है। इस पूरे खेल में शामिल सिस्टम के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आरटीआई को हथियार बनाएंगे।-अंशुल भारद्वाज, आरटीआई एक्टीविस्ट
तीनों छात्र भेजे गए जेल
उम्र बदलकर दुबारा से हाईस्कूल की परीक्षा देते हुए पकड़े गए परीक्षार्थी अनुज पुत्र धर्मवीर निवासी भुसावली जिला बुलन्दशहर, आकाश पुत्र हरेंद्र निवासी सैदपुर जिला बुलन्दशहर, हरिओम पुत्र राजेन्द्र निवासी गाजीपुर थाना बरला को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। जहां से तीनों जेल भेज दिए गए।