माता पिता के साथ प्रियंका कश्यप
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प्रियंका ने साबित कर दिया कि अगर ठान लिया जाए तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है। प्रियंका की आंखों की रोशनी उस वक्त गई थी, जब वह कक्षा छह में थी। ब्रेन ट्यूमर के आपरेशन के बाद उसकी दुनिया में अंधेरा छा गया। पढ़ाई में मेधावी प्रियंका ने पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़ने का प्रण लिया। सहारा बनी बड़ी बहन। बड़ी बहन बोल-बोलकर उसे पढ़ाने लगी। इसी तरह उसने पहले दसवीं की परीक्षा पास की और अब बारहवीं में 93 फीसदी अंक हासिल करके उन लोगों का मुंह बंद कर दिया जो कहते थे कि जब देख नहीं सकती तो पढ़ेगी कैसे।
प्रियंका कश्यप का यह संघर्ष एक प्रेरणा है उन बच्चों के लिए जो छोटी-छोटी परेशानियों के आगे हिम्मत हार जाते हैं। शहर के आगरा रोड पर मंदिर का नगला निवासी छत्रपाल सिंह की बेटी प्रियंका तीन बहनों में दूसरे नंबर की है। प्रियंका जब कक्षा छह में थी तब उसे ब्रेन ट्यूमर हो गया। लगातार दर्द बढ़ता रहा। चिकित्सकों को दिखाया तो ऑपरेशन बताया गया। खैर 2019 में परिवार वालों ने प्रियंका का ऑपरेशन करा दिया। ऑपरेशन के बाद प्रियंका को धुंधला दिखने लगा। कुछ दिन बाद पूरी तरह से ही दिखना बंद हो गया। जांच हुई तो वह 80 फीसदी दृष्टिबाधित हो गई।
परिवार वाले घबरा गए, लेकिन प्रियंका ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। प्रियंका को उसकी बड़ी बहन दीपाली पढ़कर सुनाती और प्रियंका याद कर लेती। दृष्टिबाधित होने के कारण उसे परीक्षा में लिखने के लिए सहायक के रूप में उसकी छोटी बहन निधि मिल गई। प्रियंका सवालों का जवाब देते और निधि लिखती। पहले प्रियंका ने 2023 में 10वीं की परीक्षा दी, जिसमें 79 फीसदी अंक हासिल किए। इसके बाद बारहवीं की। 13 मई को जब बारहवीं का रिजल्ट आया तो प्रियंका ने 93 फीसदी अंक हासिल किए हैं।
शिक्षक पिता बढ़ाते रहे बेटी का हौसला
प्रियंका के पिता जवाहर नवोदय विद्यालय पलवल हरियाणा में शिक्षक हैं। उनके तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी दीपाली बीएड कर रही है। जबकि अब प्रियंका ने बारहवीं पास कर ली। जबकि सबसे छोटी निधि है। परिवार वालों का कहना है कि प्रियंका के पिता हमेशा उसका हौसला बढ़ाते रहे। बार -बार कहते थे कि वह हर मंजिल हासिल कर सकती है।