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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस आज :

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Archive
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बेहतर कॅरिअर बनाने की चिंता, परीक्षा में असफल होने का डर और परिजनों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का दबाव युवाओं की मानसिक सेहत पर भारी पड़ रहा है। रोजाना तीन यानी साल में 900 युवा मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याओं को लेकर जिला अस्पताल पहुंचते हैं।
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इनमें तनाव, घबराहट, सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं से परेशान युवा भी शामिल हैं। मलखान सिंह जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 70 मरीजों में 30 नए होते हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा भी शामिल हैं। परीक्षा की तारीख नजदीक आने पर प्रदर्शन को लेकर चिंता बढ़ना, नींद प्रभावित होना और घबराहट महसूस करना उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है।


तनाव को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अस्पताल में हर साल 900 युवा आते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य से परेशान रहते हैं। मानसिक दबाव का असर हर युवा पर एक जैसा नहीं होता। किसी को बेचैनी महसूस हो सकती है तो किसी की नींद, एकाग्रता और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। लगातार सिरदर्द, घबराहट या नींद की समस्या को केवल परीक्षा का दबाव मानकर टालना उचित नहीं है। ऐसी परेशानियां बनी रहें या पढ़ाई और सामान्य जीवन प्रभावित होने लगे तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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-डॉ. सन्मित, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल


परिवार का सहयोग भी जरूरी
कॅरिअर के प्रति युवाओं पर अपेक्षाओं का दबाव कम करने में परिवार की भूमिका अहम है। पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या, पढ़ाई के बीच छोटे विराम और भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत भी तनाव से निपटने में मदद कर सकती है। स्वस्थ जीवन के लिए मानसिक स्वास्थ्य का बेहतर होना अत्यंत आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य के समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
-डॉ. फिरदौस जहां, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, जेएन मेडिकल कॉलेज


केस-1
परीक्षा का डर छीन रहा सुकून
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे राहुल बताते हैं कि परीक्षा में पेपर खराब होने की चिंता उन्हें लगातार परेशान करती है। इसी चिंता के कारण रात में नींद नहीं आती। परीक्षा की तैयारी के साथ मन में परिणाम को लेकर आशंका बनी रहती है।

केस-2
परीक्षा की तिथि आते ही बढ़ जाती घबराहट
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे मोहित कुमार के मुताबिक, जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख नजदीक आती है, उनकी घबराहट बढ़ने लगती है। इस दौरान माइग्रेन की परेशानी भी बढ़ जाती है। परीक्षा का दबाव उनके लिए मानसिक परेशानी के साथ शारीरिक तकलीफ का कारण भी बन रहा है।
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