किसी भी चुनाव में मतदान का प्रतिशत किसी भी प्रत्याशी और दल की धड़कनें बढ़ा देता है। निकाय चुनाव में पहले चरण के मतदान का प्रतिशत देख अब यहां भी सभी परेशान हैं और धड़कनें बढ़ी हुई हैं। सबने अंदरखाने अपने अपने खेमे में मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर जोर लगाना शुरू कर दिया है। वहीं विपक्षी इसे एक साजिश का हिस्सा भी मान रहे हैं। साथ में यह भी कह रहे हैं कि जो लोग भाजपा से निराश हैं, वहां मतदान प्रतिशत कम हुआ है।
हमने बूथ व पन्ना स्तर तक अपने कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है। हर वोटर तक हमारा संपर्क है। चूंकि हमारा पिछला अनुभव भी इसी वजह से कड़ुवा रहा था। इसलिए इस बार ऐसा न हो, इस बात का पूरा प्रयास किया जा रहा है और हमें उम्मीद है कि अलीगढ़ का मतदान प्रतिशत बहुत मजबूत होगा।-विवेक सारस्वत, भाजपा महानगर अध्यक्ष
मतदान प्रतिशत कम होना साफ दर्शाता है कि भाजपा के प्रति लोग निराश हैं। मगर हमारी टीमें लगातार अपने काम में सक्रिय हैं। किसी भी स्तर पर कमी नहीं छोड़ी जाएगी। अपने जिले में मतदान प्रतिशत बहुत मजबूत होगा।-संतोष सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
जो वोट गिर रहा है, यह प्रथम चरण में लगी लाइनों ने साफ कर दिया है कि वह किस दल का वोट है। इस बात की चिंता भाजपा को करनी होगी। हम पहले से चिंतित हैं और हमारी पूरी तैयारी है। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता की आज शुक्रवार को ही मीटिंग कर इस बात की हिदायत दी गई है।-अब्दुल हमीद घोषी, सपा महानगर अध्यक्ष
यह बात सही है कि मतदान का कम प्रतिशत चिंताजनक है। मगर सबसे ज्यादा असर वाराणसी व प्रयागराज में दिखा है। जहां भाजपा का कब्जा है। हमारी टीमें हर बूथ पर अपना काम कर रही हैं। हर सभा में हम मतदान प्रतिशत को लेकर जोर दे रहे हैं। हम पिछली बार की तरह अपने मतदान प्रतिशत के दम पर जीतेंगे।-मुकेश चंद्रा, जिलाध्यक्ष बसपा