90 के दशक में, जिस वक्त भारतीय संगीत, जो फिल्मों पर आश्रित था, उसका वर्चस्व तोड़ते हुए देश में बैंड का चलन डॉ. पलाश सेन के बैंड यूफोरिया के साथ शुरू किया था। करीब 20 साल बाद ही डॉ. पलाश में वैसी ही ऊर्जा है। शुक्रवार को राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी का कोहिनूर मंच डॉ. पलाश सेन की ऐतिहासिक प्रस्तुति का गवाह बना।
कार्यक्रम की शुरूआत में ही पलाश सेन ने सुनने वालों को वहां पहुंचाया, जहां से उन्होंने अपनी गायिकी की शुरूआत की थी। यूफोरिया बैंड का पहला एलबम यूफोरिया का वह गीत जो काशी की गलियों में ही फिल्माया गया था। ‘आगे जाने राम क्या होगा’ गीत के साथ उन्होंने संकेत दे दिए कि कोहिनूूर पर सुरों की महफिल बेहद शानदार सजने वाली है।
इसके बाद यूफोरिया बैंड ने भारतीय फिल्मों के गीतों को अपनी फ्यूजन शैली में प्रस्तुत किया तो दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। यहां तक कि युवतियां और महिलाएं भी स्वयं को न रोक सकीं। कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आए बच्चे भी पलाश के सुरों पर थिरक उठे। गायिकी के साथ पलाश के हाथों की जुंबिश और पैरों की थिरकन ने मंच पर और भी आकर्षण पैदा कर दिया।
पलाश ने माई री जब पेश किया तो पंडाल में माहौल सूफियाना हो गया। लेकिन इसके तुरंत बाद पलाश ने बदतमीज दिल, वदतमीज दिल माने न, गुल्कक को फोडें, अपनी तो पाठशाला मस्ती की पाठशाला, क्या मुझे प्यार है, जैसे गीतों को अपने ही अंदाज में पेश किया तो श्रोता दीवाने हो गए। पलाश ने अपनी गायिकी में बेस्टर्न रिदम का प्रयोग किया तो सुरों को बेहद शास्त्रीय अंदाज में संवारा।
आत्मा की गहराई से खींचा गया अलाप सुनने वालों के दिल में उतर गया। इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन सीडीओ धीरेंद्र सिंह सचान और एडीएम सिटी अवधेश कुमार तिवारी ने दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गौतम आदि अधिकारी मौजूद रहे।