अधिकार नहीं था, फिर भी चलती रही स्वीकृति की प्रक्रिया
जांच में मानचित्रों की स्वीकृति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई। कुछ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर मानचित्रों को स्वीकृति देने की बात कही गई है। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन ईओ के साथ अवर अभियंता की भूमिका भी जांच के घेरे में आई। शिकायत में मानचित्र पास करने के बदले रिश्वत लिए जाने के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि, रिश्वत के आरोपों की पुष्टि के लिए विभागीय जांच में तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट में मानचित्रों की स्वीकृति से सरकारी राजस्व को हुए नुकसान को गंभीरता से लिया गया है।
शासन ने मांगा जवाब, जांच अधिकारी नियुक्त
तत्कालीन एडीएम प्रशासन पंकज कुमार की संस्तुति के बाद जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। अब नगर निकाय निदेशालय के निदेशक अनुज कुमार झा ने तत्कालीन ईओ निषाद मधुरमय के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 और उत्तर प्रदेश पालिका (केंद्रीकृत) सेवा नियमावली, 1966 के तहत विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नगर निकाय निदेशालय के उप निदेशक को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच में मानचित्रों की स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की भी पड़ताल की जाएगी।