- हाईकोर्ट के आदेश पर तोड़वाए गए 17 लोगों के मकान
हाईकोर्ट के आदेश पर गांव समसपुर में राजस्व टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 मकानों को बुलडोजर चलाकर तोड़वा दिया। यह मकान सालों से स्कूल, ग्राम सभा, कब्रिस्तान की जमीन पर बने हुए थे। साथ ही 45 बीघा चरागाह की भूमि को भी जुतवाकर कब्जा मुक्त कराया गया। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पालीमुकीमपुर, अतरौली, दादों पुलिस के अलावा पीएसी व महिला फोर्स तैनात रही।
वर्ष 2012 में गांव के ही कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा कर लोगों ने अपने मकान खड़े कर लिए हैं। एडीएम के न्यायालय में यह केस चला। जिसने निर्णय में मकानों को अवैध माना था। केस हारने वाला पक्ष 2017 में हाईकोर्ट चला गया। यहां दो साल सुनवाई चली। तहसील प्रशासन और ग्राम सभा ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। जिसमें हाईकोर्ट में भी जमीन को सरकारी मानते हुए कब्जाधरियों को संपत्ति से बेदखल करने के आदेश दिए थे। तहसील प्रशासन ने लोगों को स्वयं कब्जा हटाने के कई नोटिए दिए, लेकिन कब्जा नहीं हटे। इस पर रविवार को एसडीएम अनिरुद्ध प्रताप सिह, सीओ पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में तहसीलदार जयप्रकाश, एसओ पाली सुधीर सिंह डागुर, आरआई वाजिद हुसैन पुलिस व राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जेसीबी से मकानों को ध्वस्त कराया गया।
बेघर हो गए कई परिवार
तहसील प्रशासन की कार्रवाई के बाद कल्लन, जमशेद, जाकिर खां, निसार खां, इस्लाम खां, जीशान, अली शान, इंसाद खां बेघर हो गए। इनके पास समसपुर में अन्य कोई जमीन नहीं है जिस पर यह लोग झोपड़ी भी डालकर रह सकें। प्रशासन ने अनवार, बादशाह, खान मोहम्मद, हिना, शान मोहम्मद, गुलजार, रुस्तम, सुनही, शहजाद खां, असलम जाहिद आदि के भी मकान तोड़वाए। इनमें से कुछ मकानों में दो से तीन परिवार गुजर बसर कर रहे थे। लोग ट्रैक्टर, बुग्गियों में अपना सामान व बच्चों को लेकर रिश्तेदारियों में या फिर गांव में ही जहां तहां शरण पाने को मजबूर हैं।
45 बीघा चरागाहपर फसल जुतवाई
गफ्फार खां, शंकर, फरमूदा, गुलजार, कंपोटर आदि ने करीब 45 बीघा चरागाह पर कब्जा कर धान व बाजरा की फसल बोई थी। राजस्व टीम ने ट्रैक्टर चलवाकर खड़ी फसल जुतवा दी। लोगों ने राजस्व टीम का विरोध करने की कोशिश भी की मगर पुलिस फोर्स के कारण सभी को वापस भागना पड़ा। फसल व घर टूटता देख महिलाएं और बच्चे फफककर रो पड़े।
आपसी पार्टी बंदी के कारण नुकसान
जिन लोगों के मकान टूटे हैं उनका कहना है कि गांव में दो पक्षों में पार्टीबंदी चल रही है। उस रंजिश का परिणाम हमें भुगतना पड़ा है। लोगों का कहना है कि वह सालों से इन मकानों में रह रहे हैं। केस जितवाने के नाम पर कुछ लोग उनसे हजारों की रकम भी ऐंठ चुके हैं। आरोप यह भी है कि सरकारी भूमि की जद में अन्य कई लोगों के मकान भी आ रहे हैं लेकिन उन्हें बचाया जा रहा है।
- सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों को पूर्व में नोटिस देकर स्वयं कब्जा हटाने के लिए कहा गया था। लेकिन कब्जा नहीं हटा तो जेसीबी से मकान तोड़वाकर जमीन कब्जा मुक्त कराते हुए हाईकोर्ट के निर्णय का अनुपालन कराया गया है।
- अनिरुद्ध प्रताप सिंह, एसडीएम
हम सालों से इस जमीन पर रह रहे हैं। मकान टूट जाने से हमारे पास रहने का अब कोई ठिकाना नहीं है। मजदूरी करके बच्चों का पेट पालते आ रहे हैं। दो पक्षों की रंजिश का हमें परिणाम भुगतना पड़ रहा है। बारिश में मौसम में कहां जाएं। हम बेहद परेशान हैं।
- कल्लन
समसपुर में मकानों को ध्वस्त करती जेसीबी- फोटो : ATHROLI