मलखान सिंह जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। पिछले चार दिनों से अस्पताल में शाम तीन बजे से लेकर रात आठ बजे तक बिजली गुल रहने का सिलसिला जारी है। उमस और गर्मी के बीच वार्डों में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार परेशान रहते हैं।
अस्पताल परिसर में बिजली आपूर्ति ठप होने पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए दो भारी-भरकम जेनरेटर लगाए गए हैं, लेकिन इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार इनमें से एक जेनरेटर लंबे समय से खराब है, जबकि दूसरा सही होने के बावजूद ईंधन (डीजल) की कमी के कारण शोपीस बना हुआ है। ईंधन का पुराना भुगतान न होने के कारण पंप संचालक ने डीजल की आपूर्ति बंद कर दी है। ऐसे में बिजली कटने पर अस्पताल के इन्वर्टर भी कुछ ही देर में हांफ जाते हैं और पूरा वार्ड अंधेरे में डूब जाता है।
हाल ही में अस्पताल की बिजली व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए लगभग 40 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया गया था। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद अस्पताल को अंधेरे से निजात नहीं मिल पा रही है। वार्डों में भर्ती मरीजों को मोबाइल की रोशनी में इलाज कराने और हाथ के पंखों से हवा करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
शासन से पैसा नहीं आने के चलते डीजल का भुगतान नहीं हुआ है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बारिश ओले-आंधी के चलते आपूर्ति बाधित हुई थी। बाद में बिजली सुचारू हो गई। - डॉ. जगबीर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल