आलीगढ़ शहर के सर्वोदय नगर फेज-2 (वार्ड संख्या-24) के निवासी पिछले 15 वर्षों से अंधकार में जीवन जीने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि कॉलोनी में बिजली के खंभे तो खड़े हैं, लेकिन उन पर तार (लाइन) नहीं हैं। करीब 20 परिवारों के 150 लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट घिस रहे हैं।
कई साल से बिजली अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हमारी फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही घूमती रहती है।- प्रेमवीर चौधरी
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दिनेश शर्मा ने व्यवस्था का भरोसा दिया था, खंभे भी लगवाए थे। अब विभाग कहता है खुद पैसे जमा करो, हम आम लोग सात लाख रुपये कहां से लाएं।- गजेंद्र शर्मा
योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन शहर के बीच स्थित कॉलोनी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।- देवेश भारद्वाज
सोलर पैनल से बस एक पंखा चलता और बल्ब जलता है। फ्रिज, कूलर और मिक्सी जैसे उपकरण हमारे लिए आज भी सपना हैं।- ऊषा शर्मा
रात में सुरक्षा का बड़ा खतरा रहता है। अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व घूमते हैं, बच्चों को बाहर निकालने में डर लगता है।- रजनी भारद्वाज
नगर निगम टैक्स तो पूरा लेता है, लेकिन जब सुविधा की बात आती है तो हाथ खड़े कर दिए जाते हैं। क्या हम शहर के नागरिक नहीं हैं।- मंजू
बारिश के दिनों में कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। घरों में पानी घुस जाता है।- मीनू कश्यप
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बिजली विभाग में एस्टीमेट पकड़ा दिया जाता है।- मोहिनी चौधरी
15 साल छोटा समय नहीं होता। हमारी पूरी एक पीढ़ी इस अंधेरे और कीचड़ में बड़ी हो गई है।- संतोष शर्मा
धूप न निकले तो फोन चार्ज करने तक के लाले पड़ जाते हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में हम मोमबत्ती युग में जी रहे हैं।- शिवानी
सर्वोदय नगर फेज-2 के लोग आए थे, उनको बताया गया कि दो प्रकार की योजनाएं हैं। एक सामूहिक और दूसरी व्यक्तिगत रूप से कनेक्शन लेने की। दोनों ही में शुल्क जमा कराने का प्रावधान है, लेकिन लोग चाहते हैं कि बिना किसी शुल्क के ही कनेक्शन हो तो यह स्थानीय स्तर पर विभाग के लिए संभव नहीं है।- पंकज तिवारी, अधिशासी अभियंता, नगर, बिजली निगम