इसे सपा का मिस मैनेजमेंट कहो या पूर्व मंत्री ठा. जयवीर सिंह का मैनेजमेंट। मगर रामसखी कठेरिया को 2006 में खुद के समर्थन से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाकर और 2011 में सुधीर चौधरी के बाद इस बार भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू को जिताकर, पूर्व मंत्री ठा. जयवीर सिंह ने जिले की सियासत में लगातार तीसरी बार अपने रसूख का आंकलन करा दिया है।
यह बात किसी से छिपी नहीं कि इस बार बसपा के मात्र 13 जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीतकर आए थे। हर दल निर्दलों के सहारे नैय्या पार लगाने की जुगत में था। लेकिन 13 से यह आंकड़ा 42 तक पहुंचाने और सत्ताधारी सपा को धूल चटाने में उन्होंने पूरी ताकत लगा दी। यही वजह रही कि बसपा के आगे सत्ताधारी दल सपा क्लीन बोल्ड हो गया। इसके पीछे बड़ी वजह जिला पंचायत के मझे हुए खिलाड़ी तेजवीर सिंह गुड्डू की टिकट कटना भी माना जा रहा है।
जिस दिन पंचायत चुनाव की मतगणना के बाद जिले में 52 सीटों पर परिणाम घोषित हुए थे। उसी दिन से यह कयास लगाए जाने लगे थे कि आखिर अगला जिला पंचायत अध्यक्ष कौन होगा? बसपा के पास जहां 13 जिला पंचायत सदस्य थे। वहीं अन्य पार्टियां भी अपने पास 9 से 10 सदस्य होने का दावा कर रही थीं।
ऐसे में यही कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार कहीं सत्ताधारी सपा या संयुक्त विपक्ष हाथ न मार जाए। इसे लेकर संयुक्त विपक्ष की बैठक भी हुई थी और अध्यक्ष पद के लिए टाल ठोकते हुए प्रत्याशी पर भी चर्चा हुई, लेकिन संयुक्त विपक्ष की सारी योजना पूर्व मंत्री के मैनेजमेंट के आगे फेल हो गईं।
उन्होंने अपने सियासी रसूख के आगे सभी को बौना साबित करते हुए सत्ताधारी दल को 9 वोटों पर सीमित कर दिया। बता दें कि 9 में से एक वोट खुद सपा प्रत्याशी का होगा। इस तरह शेष 8 वोट ही उन्हें मिले हैं। इस चुनाव में उनके इस दमखम को देख अन्य दल भी भौचक हैं।