अतरौली में चुनावी चाय पर चर्चा करते स्थानीय लोग।
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कड़कड़ाती ठंड में चुनावी माहौल ने प्रत्याशियों से लेकर वोटरों तक का पारा हाई कर रखा है। दुकानों से लेकर चौपालों तक लोग चहेती पार्टी से लेकर प्रत्याशी तक की जीत-हार का गुणा भाग लगा रहे हैं। अलग-अलग पार्टियों को समर्थन करने वाले लोग जब आपस में टकराते हैं तो तीखी बहस माहौल को गर्म कर देती है।
शुक्रवार दोपहर को अतरौली के घंटाघर के निकट चाय की दुकान पर बैठे वरुण चौधरी ने कहा कि बाबूजी कल्याण सिंह की वजह से अतरौली की सीट वीआईपी बनी थी। अब यह पहला चुनाव है, जब बाबूजी के बिना हो रहा है। अंशुल भारद्वाज ने कहा कि अतरौली में ऐसा कोई काम नहीं हुआ। जिसे हम कह सकें कि यह हमारी धरोहर है। रामघाट रोड भी फोर लेन नहीं हुआ। एक भी गांव सांसद आदर्श गांव नहीं बन सका। रवि अरोरा ने कहा कि मतदाता विकास की आस देखते हैं। सरदार परमजीत सिंह ने कहा कि आने वाला विधायक अतरौली क्षेत्र में लोगों को रोजगार के लिए बड़ी फैक्टरी व गन्ना मील लेकर आए। साथ ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च शिक्षण संस्थान बनाने के लिए प्रयास करे। अतरौली ने सूबे को दो मुख्यमंत्री दिए हैं, लेकिन उतना विकास नहीं हुआ। अतरौली व सैफई में जमीन आसमान का अंतर है।