फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ः चुनाव प्रचार सामग्री का बाजार ठंडा, नहीं बिका बैनर, झंडा

विज्ञापन
विज्ञापन
अभिषेक तायल
विज्ञापन

विधानसभा चुनाव में प्रचार सामग्री का बाजार ठंडा पड़ा है। कोरोना गाइडलाइन के तहत चुनाव आयोग ने रैली, जनसभा व रोड शो पर रोक लगा रखी है। ऐसे में राजनीतिक दलों द्वारा वर्चुअल प्रचार करने से जिले की करीब दो दर्जन से अधिक प्रिंटिंग प्रेस के कारोबार व रोजगार पर असर पड़ा है। जानकारों के अनुसार, 2017 के विधानसभा चुनाव में झंडे, बैनर, फ्लैक्स, रिबिन, बिल्ले, पंफलेट आदि का करीब 60 से 70 लाख रुपये का कारोबार हुआ था। लेकिन इस बार यह कारोबार 20 प्रतिशत पर सिमट कर रह गया है।
जिले की सात विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान है। ऐसे में भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा, रालोद, आप सहित अन्य राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों के वर्चुअल प्रचार में लगे हैं। इससे पहले चुनावों में झंडे, पंफलेट, पोस्टर, बैनर, टीशर्ट, टोपी, वॉल पेंटिंग के जरिये प्रचार होता था। चुनाव आयोग के निर्देश ने इस बाजार को ठंडा कर दिया है। इस बार झंडे, बैनर के कारोबारी ऑर्डर का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि 20 प्रतिशत कारोबार रह गया है। दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन ने कोरोना के चलते चुनाव सामग्री दुकानों के अंदर करा दी है। जब प्रचार सामग्री दिखेगी नहीं तो बिकेगी कैसे। ऐसा ही हाल वॉल पेंटिंग करने वालों का है। उनका कहना है कि अभी तक किसी राजनीतिक दल से कोई काम नहीं मिला है। संवाद
विज्ञापन

पहले ही तैयार रहती थी चुनाव सामग्री
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद कोरोना ने देश में दस्तक दी थी। इससे पहले चुनाव सामग्री झंडा, बैनर, टोपी आदि पहले ही तैयार कर लिए जाते थे ताकि ऑर्डर मिलने पर समय पर आपूर्ति की जा सके। लेकिन कोरोना के चलते सोशल मीडिया ने चुनाव प्रचार के बाजार को ठंडा कर दिया है।
- कोरोना काल से पहले वर्चुअल प्रचार बहुत कम था। राजनीतिक पार्टियां झंडे, बैनर, पोस्टर, रिबिन, बिल्ले आदि के ऑर्डर देती थीं। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है। उल्टा प्रशासन ने कोरोना का हवाला देते हुए चुनाव सामग्री दुकान के अंदर करा दी है। इस बार बाजार पूरी तरीके से ठंडा पड़ा है।
विज्ञापन

- भुवनेश आधुनिक, चुनाव सामग्री विक्रेता अचल रोड
- वर्चुअल प्रचार के कारण काम बहुत कम है। नामांकन के बाद काम आने की उम्मीद है। फ्लैक्स, पंफलेट जैसी चुनाव सामग्री के आर्डर काफी कम हैं। पहले चुनावों में कभी ऐसा नहीं हुआ। इससे रोजगार पर भी असर पड़ा है। पहले के चुनावों में समय कम पड़ जाता था, इतना काम रहता था।
- अजय राज लीथो, लीथो ऑफ सैट प्रिंटर्स, अचल रोड
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें