मलखान सिंह जिला अस्पताल में रविवार को एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं और स्टाफ की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हुए। यहां कूल्हे के तेज दर्द से कराह रही कृष्णापुरी मठिया की 70 वर्षीय माया देवी पौन घंटे तक इमरजेंसी के बाहर दर्द से कराहती रही, लेकिन स्टाफ उसे भर्ती करने को तैयार नहीं था। इस दौरान बहू की जब स्टाफ से काफी नोकझोंक हुई, तब जाकर हंगामा मचने पर महिला को भर्ती किया गया।
परिजनों ने बताया है कि माया देवी के कूल्हे में फ्रैक्चर होने पर करीब पांच दिन पहले एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराया गया था। इसके बाद दर्द और सूजन बढ़ने पर शनिवार को बहू आरती उन्हें मलखान सिंह जिला अस्पताल लेकर पहुंची थी। चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताते हुए उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था, लेकिन परिजन महिला को वहां नहीं ले गए।
रविवार दोपहर करीब दो बजे फिर से असहनीय दर्द होने पर बहू उन्हें जिला अस्पताल ले आई। आरोप है कि स्टाफ ने शनिवार को महिला को रेफर किए जाने संबंधी दस्तावेज देखकर दोबारा जेएन मेडिकल कॉलेज जाने की बात कह दी। इसी दौरान बहू और अस्पताल कर्मियों के बीच कहासुनी हो गई। इस बीच वृद्धा अस्पताल परिसर में दर्द से कराहती रही।
नोकझोंक व हंगामे के बीच करीब 45 मिनट बाद चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती कर उपचार शुरू कराया। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उपचार मिल जाता तो वृद्धा को इतनी देर तक असहनीय पीड़ा नहीं झेलनी पडती। वहीं सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा का कहना है कि महिला को डाक्टर द्वारा जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। फिर भी महिला यही भर्ती कराने के लिए जिद कर रही थी। वृद्धा को भर्ती कर लिया गया है। सुबह डॉक्टर काजिम देखेंगे।
सर्प दंश पीडि़त को आधा घंटा बाद मिला उपचार
पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय की इमरजेंसी में भी रविवार को कुछ इसी तरह के हालात देखने को मिला। यहां सर्प दंश से पीडि़त किसान को आधे घंटे तक उपचार के लिए भटकना पड़ा, तब जाकर उपचार मिला।
अकराबाद के गांव जुझारपुर में कुंतेश यादव खेतीबाड़ी के साथ-साथ पशु पालन भी करते हैं। परिजनों ने बताया है कि रविवार की सुबह करीब दस बजे वह पशुओं के लिए चारा लेने के लिए खेतों की ओर जा रहे थे। रास्ते में सर्प ने उन्हें डस लिया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बायगीर के पास फायदा नहीं होने पर उन्हें डीडीयू लाया गया।
चचेरे भाई सीटू यादव ने बताया है कि अस्पताल में उन्हें करीब आधे घंटे तक उपचार के लिए भटकना पड़ा। सीएमएस महेंद्र कुमार माथुर का कहना है कि उसके पैर पर पटी बंध रही थी, जिसको डॉक्टर ने खोलने के लिए कहा था। इस पर उसके भाई ने मना कर दिया था। बाद में उसको आईसीयू में भर्ती करा दिया है।