9 फरवरी 2010 को श्रेयस ग्रामीण बैंक की शाखा पलसेड़ा, पिसावा पर पांच-छह लोग घुस आए। तब प्रबंधक कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। कैशियर कैश चेस्ट बंद कर रहे थे। बैंक में घुसे लोगों ने प्रबंधक, कैशियर व संदेशवाहक का गिरेबां पकड़कर तमंचे तान दिए और मोबाइल लेकर स्टेशनरी रूम में बंद कर दिया। इसके बाद बैंक से 15 लाख 60 हजार 952 रुपये लूट ले गए।
अलीगढ़ के पिसावा में 14 वर्ष पहले हुई बैंक डकैती की घटना में अदालत ने आठ दोषियों को दस-दस वर्ष कैद व अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला एडीजे प्रथम संजीव कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया है।
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अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार घटना 9 फरवरी 2010 की है। वादी मुकदमा श्रेयस ग्रामीण बैंक की शाखा पलसेड़ा, पिसावा के प्रबंधक लालबहादुर ने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन दोपहर करीब 03:30 बजे पांच-छह लोग बैंक में घुस आए। तब वे कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। कैशियर कैश चेस्ट बंद कर रहे थे। अंदर आने पर संदेशवाहक हरीशंकर शर्मा ने उन लोगों से पूछा कि क्या काम है? इस पर उन्होंने संदेशवाहक के सवाल को टालते हुए सीधे प्रबंधक, कैशियर व संदेशवाहक का गिरेबां पकड़कर तमंचे तान दिए और मोबाइल लेकर स्टेशनरी रूम में बंद कर दिया।
इसके बाद बैंक से 15 लाख 60 हजार 952 रुपये लूट ले गए। इस दौरान काउंटर पर रखा मोबाइल भी लूट ले गए थे। बाद में तीनों ने खुद को खोलकर शोर मचाया और पब्लिक जमा हुई। तब तक आरोपी भाग चुके थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर घटना का खुलासा किया। जिसमें प्रवेश व शिवकुमार उर्फ शिब्बू निवासी विजना, नेत्रपाल निवासी पलसेड़ा, विरजू उर्फ बृजमोहन, श्याम, वीरेंद्र, भीमा उर्फ कुलदीप निवासी गांव कीरतपुर खैर व देवेंद्र चौहान निवासी गांव बामौती खैर का नाम उजागर कर सभी को गिरफ्तार किया। मामले में चार्जशीट दायर की गई। इसी मामले में अदालत ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर सभी को सजा सुनाते हुए पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।