बिहार के कटिहार से दिल्ली जाने वाली कामाख्या नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस में सवार आठ बच्चों को रविवार रात आरपीएफ-जीआरपी की टीम ने मानव तस्करों के चुंगल से मुक्त कराया। साथ ही चार मानव तस्करों को मौके से दबोचा गया। बरामद बच्चों में से सात बच्चे कटिहार के और एक बच्चा उप्र के बुलंदशहर का है।
इन सभी को दिल्ली घुमाने के बहाने तस्कर दिल्ली-पंजाब में मजदूरी कराने के लिए साथ ले जा रहे थे। यह पूरी कार्रवाई बचपन बचाओ आंदोलन संस्था की सूचना पर हुई। संस्था के अरशद मेहंदी की ओर से जीआरपी में मुकदमा दर्ज कराया गया है। चारों तस्करों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं, सभी बच्चों को शेल्टर होम भेजा गया है।
वाकया रविवार रात का है। नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस के अलीगढ़ जंक्शन पर पहुंचने से पहले आरपीएफ को सूचना मिली कि ट्रेन में भारी संख्या में बच्चों को तस्करी कर दिल्ली की ओर ले जाया जा रहा है। इस पर आरपीएफ पोस्ट कमांडर चमन सिंह तोमर और जीआरपी इंस्पेक्टर अब्दुल मुईज के नेतृत्व में टीम अलर्ट हो गई।
बचपन बचाओ आंदोलन संस्था की टीम भी पहुंच गई। ट्रेन आने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ। बोगी संख्या डी-3, एस-5, एस-6, एस-9 से आठ बच्चों को बरामद किया गया। साथ ही चार तस्करों को भी मौके से दबोचा गया। सभी को पूछताछ के लिए थाने लाया गया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह कटिहार जिले से सात और बुलंदशहर जिले से एक बालक को दिल्ली घुमाने का लालच देकर दिल्ली और पंजाब में मजदूरी कराने के लिए ले जा रहा था। सभी बच्चों की उम्र 14 वर्ष से कम निकली।
इस पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय को बुलाया गया। उन्होंने सभी बच्चों का एंटीजन टेस्ट कराया, जिसमें सभी निगेटिव पाए गए। सभी बच्चों को तालानगरी स्थित सेवियो शेल्टर होम में भेजा गया।
ट्रेन से पकड़े तस्कर विनोद सिंह निवासी बाघमारा, नवाबगंज, कटिहार, बिहार, जमील अख्तर निवासी दौतलाबाद, आलम नगर, कटिहार, बिहार, मो. सद्दाम निवासी मलिकपुर, बलरामपुर, कटिहार, बिहार और प्रेमपाल पुत्र महेंद्र सिंह निवासी औरंगाबाद, बुलंदशहर के खिलाफ बचपन बचाओ आंदोलन की टीम के सदस्य अरशद मेहंदी की ओर से तहरीर दी गई, जिसके आधार पर जीआरपी थाने में मानव तस्करी, बाल श्रम, बाल संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। सोमवार दोपहर को इन चारों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
आरपीएफ पोस्ट कमांडर चमन सिंह तोमर व जीआरपी इंस्पेक्टर अब्दुल मुईज ने बताया कि गिरोह के तार खंगाले जा रहे हैं। पूछताछ में सामने आया कि मानव तस्कर गिरोह बच्चों के परिवार वालों को पैसे व बच्चों को घुमाने फिराने का प्रलोभन देकर अन्य प्रदेशों में ले जाकर बाल श्रम कराते थे। इसकी एवज में उनको ठेकेदारों से मोटा मुनाफा मिलता था।
रेस्क्यू टीम में ये रहे शामिल
जीआरपी इंस्पेक्टर अब्दुल मुईज, आरपीएफ पोस्ट कमांडर चमन सिंह तोमर के अलावा बचपन बचाओ आंदोलन से अरशद मेहंदी, राकेश कुमार, जय कुमार, दिलीप कुमार, विनोद कुमार, ओमवीर, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय, चाइल्ड लाइन निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा व उनकी टीम के सदस्य।