त्याग व बलिदान के प्रतीक ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार आज बुधवार को मनाया जाएगा। मुस्लिम समाज के लोग अपने इलाकों की मस्जिदों में ही नमाज पढ़ेंगे। मस्जिदों में नमाज के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर दिया गया है। इसके बाद बकरों व पड्डों की कुर्बानी देकर पैगंबर हजरत इब्राहिम (अस) की सुन्नत अदा की जाएगी। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने कुर्बानी के बाद गली, सड़क में मांस के अवशेष व चमड़ा न फेंकने की अपील की है।
मंगलवार दोपहर 1:30 बजे तेज बारिश होने के बाद ऊपरकोट बाजार में खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अब्दुल करीम चौराहा से लेकर ऊपरकोट इलाके में जबर्दस्त भीड़ रही। महिलाओं ने जहां अपनी जरूरत की चीजें खरीदीं। वहीं, नमाज पढ़ने के लिए पुरुषों ने कुर्ता-पायजामा खरीदा। डेनिम, लोन, चिकन कॉटन कुर्ता-पायजामा ज्यादा पसंद किए गए हैं। सिवईं की खरीदारी भी की गई। बनारसी सिवईं की मांग लच्छा व सूतफेनी से ज्यादा रही। देर शाम तक बकरों व पड्डों की भी खरीदारी जारी रही। तीन दिन तक जानवरों की कुर्बानी दी जाएगी।
उधर, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष बाबा फरीद आजाद ने भुजपुरा स्थित कार्यालय हज मुबारक कार्यक्रम किया, जिसमें कोरोना महामारी के चलते देश से लोग हज यात्रा पर नहीं जा सके। आने वाले साल में लोग हज यात्रा पर जाएं, ऐसी दुआ करते हैं। इस अवसर पर मजहर उद्दीन, सूफी मुबीन, हाजी मशहूर अहमद, मोहम्मद हसीन, मोहम्मद नदीम खान, मुस्तकीम आदि मौजूद रहे।
कब्रिस्तान में भरा पानी
शाहजमाल स्थित कब्रिस्तान में बारिश का पानी भर गया। कब्रिस्तान कमेटी के संरक्षक गुलजार अहमद ने बताया कि दो दिन से हो रही रुक-रुक बारिश से कब्रों में पानी भर गया है। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़ने के बाद लोग कब्रिस्तान आते हैं और अपने बिछड़े रिश्तेदारों की कब्रों पर गुलपोशी व फातिहा पढ़ते हैं, लेकिन पानी भर जाने से लोगों को परेशानी होगी। इसलिए नगर निगम के अधिकारियों से मांग करते हैं कि पंपिंग सेट लगवाकर पानी निकालें।
इस बार कुर्ता-पायजामा का बाजार थोड़ा कमजोर है। कोरोना काल में कारोबार बेपटरी है। फिर भी लोगों ने अपने बच्चों के लिए कुर्ता-पायजामा खरीदे हैं।
- शारिक कुरैशी, कुर्ता-पायजामा विक्रेता
कोरोना काल में सिवईं का कारोबार ठीक नहीं है। पहले लोग एक-दूसरे के घर आते-जाते थे, तो सिवईं की खपत ज्यादा थी, लेकिन कोरोना के कारण लोगों का जाना कम हो गया है।
- मोहम्मद इरफान, सिवईं, विक्रेता
सोशल मीडिया पर भी सज रही बकरा मंडी
कोरोना महामारी के मद्देनजर इस बार ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर बकरे की खरीद-फरोख्त के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है। कुछ लोगों ने व्हाट्स एप ग्रुप बना रखे हैं, जिस पर बकरे का फोटो उसका वजन, उसकी खासियत और अन्य विवरण दर्ज कर दिया जाता है। इसके बाद दिए गए नंबर पर खरीदार संपर्क कर लेते हैं।
इस तरह सोशल मीडिया, बकरीद पर बकरे की खरीद-फरोख्त का एक माध्यम उभर कर आया है। शाह जमाल में लगी बकरों की मंडी में एक बकरा आकर्षण का केंद्र रहा। बीवी की सराय के रहने वाले अनीस ने बकरे की कीमत दो लाख रुपये तक मांग ली है। पठान मोहल्ला के रहने वाले इरशाद अली ने अपने तोतापरी प्रजाति के बकरे की कीमत 75 हजार रुपये लगाई है।
महामारी ने लोगों की जीवन शैली और खरीद-फरोख्त में बदलाव किए हैं। यही बदलाव इस बार बकरीद पर बकरे की खरीद-फरोख्त में भी देखने को मिल रहा है। कुछ लोग हैं, जो मंडियों में जाना नहीं चाहते। वह सोशल मीडिया के माध्यम से पहले जानकारी जुटा लेना चाहते हैं।
- आसिफ खान, काला महल
शानदार और खूबसूरत बकरे की फोटो सोशल मीडिया के जरिये शेयर की जाती है, जिससे उसकी कीमत अच्छी मिल सके। साथ ही लोगों को अच्छा जानवर भी मिल जाए। इसलिए सोशल मीडिया को बकरा बेचने वाले सोशल मंडी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
- नूर अफजल आजाद, जयगंज डाकखाना