कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-जुहा आज,सुरक्षा के रहेंगे पुख्ता इंतजाम
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ईद-उल-जुहा के लिए शहर तैयार है। ईदगाह पर ईद की नमाज के लिए सभी तैयारियां की गई हैं। इस मौके पर लोगों ने कुर्बानी के बकरे, कपड़े, खजूर और सेंवई आदि खरीदी हैं। बकरीद पर कुर्बानी देना शबाब का काम माना जाता है। इसलिए हर कोई इस दिन कुर्बानी देता है। दोदपुर, मेडिकल रोड, रसलगंज, ऊपरकोट, देहली गेट आदि इलाकों में सजावट की गई है।
देर रात तक बाजारों में सामान खरीदे जाते रहे। इस्लाम के पांच फर्ज माने गए हैं। हज उनमें से आखिरी फर्ज माना जाता है। मुसलमानों के लिए जिंदगी में एक बार हज करना जरूरी है। हज होने की खुशी में ईद-उल-जुहा का त्योहार मनाया जाता है।
इस्लाम में बलिदान का बहुत अधिक महत्व है। कहा गया है कि अपनी सबसे प्यारी चीज रब की राह में खर्च करो। रब की राह में खर्च करने का अर्थ नेकी और भलाई के कामों में। ईद-उल-जुहा के सामान यानी कि कुर्बानी के तीन हिस्से किए जाते हैं। एक हिस्सा खुद के लिए, दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा दान के लिए होता है।