शनिवार सुबह से बादल छायेे। सूरज की किरणें मद्धिम रोशनी बिखेरती रहीं। ठहर ठहर कर हवाएं चलीं। गरमी परेशान नहीं कर रही थी। इसलिए ईद की नमाज पूरे शहर में खुशनुमा माहौल में हुई। शाहजमाल ईदगाह, जामा मस्जिद ऊपरकोट, जामा मस्जिद एएमयू, जमालपुर ईदगाह, बू अली शाह मस्जिद ऊपरकोट सहित अन्य मस्जिदों में ईद-उल-फितर की नमाज जोश ओ खरोश के साथ हुई।
शाहजमाल ईदगाह पर शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने ईद की नमाज से पहले अपनी तकरीर में ‘कुरान ए पाक’ और ‘हदीस’ की कई मिसालें पेश करते हुए फरमाया कि सोने का खजाना भी छोड़ना पड़ता है तब कहीं अल्लाह की रहमत नसीब होती है। रमजान की अहमियत पर बताया कि रोजे क्यों जरूरी हैं..? बोले.. इक्कीसवां, तेईसवां, पच्चीसवां, सत्ताइसवां और उनतीसवां रोजा सबसे खास हैं। इन पांच दिनों पूरी रात इबादत करने वालों को एक रात के बदले अस्सी साल की इबादत का शबाब हासिल होता है। ईद रमजान के तीस रोजे के बाद खुदा का तोहफा है।
ईद की नमाज से पहले ही हर हाल में ‘जकात’ (कमाई के पांचवें हिस्से के बराबर का दान) का फर्ज अदा करें, ताकि जरूरतमंद गरीब भाई बहन भी ईद मना सके। त्योहार ऐसा हो कि आपके परिवार, खानदान, पड़ोस और मोहल्ले में कोई ऐसा न हो जो ईद न मना सके। शहर मुफ्ती ने कहा कि रमजान पूरे हो गए हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि अब नमाज नहीं पढ़ना है। वैसे ही नमाज अदा फरमाएं जैसे रमजान में कर रहे थे। गांव, गली, मोहल्ले की हरेक मस्जिद में नमाज पढ़ें। वहां साफ सफाई करें और इमदाद (दान) दें। मस्जिद खुदा का घर है इसलिए अपने रिहायशी मकानों को मस्जिदों से ऊंचा न बनाएं। अपने घर आने वाले मेहमानों को घर के दरवाजे तक विदा करें। उनको पूरी इज्जत बख्शें। ये आपका फर्ज है।
7.00 बजे पहला, 7.15 बजे दूसरा और 7.30 बजे तीसरा गोला दागा गया। ठीक साढ़े सात बजे नमाज खड़ी (शुरू) हो गई। इमाम कारी सागिल ने नमाज पढ़वाई। नमाज के बाद खुतबा पढ़वाया गया। इसके बाद भीषण गरमी से राहत दिलाने के लिए ठंडी हवाओं के साथ रहमत की बारिश की दुआ मांगी गई। हम वतन हिंदू भाइयों के साथ अमन ओ चैन से रहने की दुआ हुई। आखिर में इमाम कारी सागिल ने कहा कि अल्लाह सबको कारोबार में बरकत दे। सेहत दे और इज्जत बख्शे। सभी खुशनसीब रहें। शहर में, मुल्क में और दुनिया में अमन चैन कायम हो। नमाज के बाद प्रबुद्ध लोगों ने शहर मुफ्ती के साथ मुसाफा (गले मिल कर ईद की बधाई देना) किया। यासीन पेंटर ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम के प्रबंधों की सराहना की।
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नेशनल हास्पिटल को इमदाद दें
अलीगढ़। यहां बताया गया कि हाल ही में मीट एक्सपोर्टर हाजी जहीर कुरैशी ने 16.50 लाख रुपये की डिजीटल एक्सरे मशीन अस्पताल को दी है। जिसका फायदा अवाम को मिल रहा है। अस्पताल की महीने की तनख्वाह का खर्च 80 हजार रुपये तक आता है 20 हजार रुपये की दवाएं बंटती हैं। अस्पताल को सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। इसलिए अस्पताल को इमदाद दें।
कब्र का खर्च अब 600 रुपये, पक्की कब्र हरगिज न बनवाएं
अलीगढ़। ईद की नमाज में बताया गया कि शाहजमाल की शम्सुल आरफीन कब्रिस्तान में अब कब्र खुदवाने का खर्च 600 रुपये मुकर्रर कर दिया गया है। जिसमें 550 रुपये कब्र खोदने वाले को दिए जाते हैं और 50 रुपये कब्रिस्तान की कमेटी को दिए जाते हैं। ये 50 रुपये वहां के रखरखाव में खर्च होते हैं। ये भी सख्त हिदायत दी गई कि पक्की कब्र न बनवाएं। अगर सभी पक्की कब्र बनवाएंगे तो बाकी लोगों की कब्रें कहां बनेगी..?
मगरिब की नमाज के बाद औरतें न जाएं
अलीगढ़। शहर मुफ्ती ने खासतौर पर ताकीद की है कि हर शाम सात बजे होने वाली मगरिब की नमाज के बाद औरतें कब्रिस्तान में न जाएं। इसका खासतौर पर परहेज करें। ऐसा न करने से किसी भी तरह की परेशानी हो सकती है।
...तो दारुल कजा में जाएं
अलीगढ़। नमाज से पहले की तकरीर में बताया गया कि अलीगढ़ में शरई अदालत ‘दारुल कजा’ मौजूद है। अपने पारिवारिक मसले इसी में लेकर पहुंचे। वहां पर ही सुलझाएं। यही इस्लाम की हिदायत है। बेवजह के चक्करों में न पड़े। दारुल कजा का स्थान पहले है।
रासुका लग रही है नौजवानों एहतियात बरतो..
शाहजमाल ईदगाह से जोशीले और जज्बाती नौजवानों को इशारों इशारों में एक स्पष्ट संदेश दिया गया कि वो हर हाल में नियम कानून के दायरे में रहें। बेवजह के बयान न दें। अनावश्यक धरना प्रदर्शन या जुलूस निकालने से बचें। अगर कोई नाइंसाफी हो रही है तो पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से मिले। उनके समक्ष अपनी बात रखें। यकीनन अगर मामला सही है तो पूरी मदद मिलेगी। अगर कोई अधिकारी नहीं सुन रहा है तो डीएम चंद्रभूषण सिंह या एसएसपी अजय साहनी के समक्ष अपनी बात रखें। इस बीच कई बार माइक पर गूंजा रासुका लग रही है आप बेवजह की हरकतों में न पड़ें। दरअसल, अतिउत्साही युवाओं के लिए ईद की नमाज में दी गई ये नसीहत बेवजह नहीं थी। गुजरे वर्ष रक्षाबंधन के दिन रेलवे रोड पर सुरेश कचौड़ी वाले ने दो मुस्लिम दबंग भाइयों को गोली मार दी थी दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष को मुआवजा और न्याय दिलाने के लिए ऊपरकोट पर जुमे की नमाज के दौरान हंगामा, पथराव और लाठीचार्ज हुआ। पुलिस सख्त हुई तो उपद्रवियों की पहचान और धरपकड़ शुरू हुई। इसके बाद हाल ही में जिला प्रशासन ने एक युवक पर रासुका की कठोरतम कार्रवाई की है। एक अन्य युवक पर भी ऐसी की कार्रवाई प्रस्तावित है। इसी वजह से युवाओं को इस तरह की सख्त कार्रवाई से बचाने के लिए नियम कानून के दायरे में रहने की ताकीद बार बार की गई। जिला प्रशासन के सभी अधिकारियों ने पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने ईद की नमाज में युवाओं को इस तरह से समझाने की सराहना की।
बेहद कड़ी रही सुरक्षा, ईदगाह पर घूमता रहा ड्रोन कैमरा
ईद की नमाज पर सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद रही। खुद एसएसपी अजय साहनी और एसपी सिटी अतुल कुमार श्रीवास्तव, एसी क्राइम आशुतोष द्विवेदी मौके पर मौजूद रहे। यहां पर ड्रोन कैमरों से निगरानी के साथ वीडियोग्राफी भी कराई गई। तीन कंपनी आरएएफ, दो कंपनी पीएसी, 50 उप निरीक्षक, 8 थाना प्रभारी, शहर में तैनात क्षेत्राधिकारियों के अलावा तीन अतिरिक्त क्षेत्राधिकारी, तीन सौ कांस्टेबिल, शहर के सभी थानों के थाना प्रभारी ईद की नमाज मुकम्मल होने तक अलग अलग स्थानों पर तैनात रहे। ईदगाह जाने वाले सभी रास्तों पर पहले से ही बैरीकेडिंग कर दी गई थीी। सुबह छह बजे के बाद से बदला हुआ यातायात प्लान लागू हो गया। जो ईद की नमाज के बाद दोपहर 11 बजे तक प्रभावी रहा। ईदगाह स्थल पर एंटी माइनस, एंटी सबोर्स्टाज, हैंड मेटल डिटेक्टर, बम स्क्वायड, डॉग स्कावाड से चेकिंग की गई थी। पूरी रात पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे में रहने के बाद सुबह ईदगाह कमेटी के पदाधिकारियों के आने के बाद यहां का ताला खोला गया। नमाज शुरू होने से पूरी होने तक ड्रोन कैमरों से निगरानी कराने के साथ वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई।