एप का दुरुपयोग
कम कीमत वाले ई-रिक्शा और ई-स्कूटरों में अक्सर सुरक्षा व्यवस्था संसाधन कमजोर होते हैं। ऐसे वाहनों में डिफॉल्ट ब्लूटूथ सेटिंग खुली रहती है। इससे कोई भी व्यक्ति इस एप से वाहन को नियंत्रित कर सकता है। इन बैटरियों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम नामक चिप लगी होती है। यह चिप बैटरी के मापदंडों जैसे वोल्टेज, तापमान और करंट की निगरानी करती है। उसी चिप को इस एप से नियंत्रित किया जा रहा है। चलते हुए वाहन को भी बीच सड़क पर रोका जा रहा है।
सुरक्षा उपाय और चालकों की परेशानी
लिथियम बैटरी वितरक रूपेश पाठक का कहना है कि उनकी कंपनी की बैटरी नियंत्रण के लिए अपना एक एप है। इसके सहारे हर बैटरी का एक पासवर्ड बनवाया जाता है। जिन्होंने पासवर्ड नहीं बनाया है, उन्हें यह समस्या आ सकती है। वे लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि सभी अपनी बैटरी का पासवर्ड बनाकर उसे सुरक्षित कर लें।