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Aligarh News: नमी पहुंची तो दूध की तरह फट सकता है ई-20 पेट्रोल

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पंप पर पेट्रोल डलवाते लोग। संवाद 
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ई-20 पेट्रोल नीति को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। सरकार और तेल कंपनियां एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के फायदे गिना रही हैं, लेकिन गैराज संचालक पुराने वाहनों में इसके इस्तेमाल से 50 फीसदी तक माइलेज में कमी की शिकायतें आने का दावा कर रहे हैं। इनका कहना है कि जिस तरह दूध फटता है, उसी तरह नमी आने पर ई-20 पेट्रोल भी फट सकता है, जिसे तकनीकी भाषा में फेज सेपरेशन कहते हैं।


यह दिखने में दूध फटने जैसा अलगाव है, लेकिन विस्फोट या रासायनिक फटना नहीं है।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग भी पहले की तुलना में माइलेज कम मिलने का दावा कर रहे हैं। कुछ वाहन मालिक फ्यूल फिल्टर जल्दी गंदा होने और पुराने वाहनों में रबर व प्लास्टिक के पुर्जों पर असर पड़ने की आशंका भी जता रहे हैं। अमर उजाला ने शहर के पेट्रोल पंप संचालकों, वाहन इंजीनियरों और ग्राहकों से बातचीत कर स्थिति समझने का प्रयास किया।
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वाहन कंपनियां भी रख रही नजर
शहर के एक प्रमुख चारपहिया वाहन शोरूम संचालक ने बताया कि अभी तक उनके पास किसी बड़े तकनीकी दोष की शिकायत नहीं आई है। कंपनियां इस विषय पर लगातार अध्ययन कर रही हैं। हाल में एक ग्राहक की शिकायत की जांच के लिए कंपनी के इंजीनियर भी पहुंचे थे। एक दोपहिया शोरूम संचालक के अनुसार ग्राहकों से माइलेज संबंधी शिकायतें जरूर मिली हैं, लेकिन किसी बड़े यांत्रिक दोष की पुष्टि नहीं हुई है।

पेट्रोल वितरकों की सलाह : टैंक में नमी न पहुंचने दें
पेट्रोल पंप संचालक ठाकुर कुशलपाल सिंह ने बताया कि पिछले कई महीनों से सभी तेल कंपनियां ई-20 पेट्रोल की आपूर्ति कर रही हैं। अब तक किसी ग्राहक ने सीधे कोई तकनीकी शिकायत नहीं की, हालांकि 10 से 15 प्रतिशत तक माइलेज घटने की बातें जरूर सुनने में आई हैं। बारिश के मौसम में सबसे जरूरी फ्यूल टैंक को पानी और नमी से बचाकर रखना है। यदि टैंक में नमी पहुंचती है तो एथेनॉल और पेट्रोल अलग-अलग परतों में बंट सकते हैं, जिससे वाहन के प्रदर्शन पर असर पड़ता है।

वाहन धुलाई के समय रहें सावधान
पेट्रोल पंप संचालक प्रशांत गुप्ता गोलू ने भी वाहन चालकों को धुलाई और बारिश के दौरान टैंक में पानी नहीं जाने देने की सलाह दी। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में जंग, झटके और ईंधन आपूर्ति संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

वाहन खराब होने की पुष्टि नहीं
. पिछले एक वर्ष से अधिक समय से ई-20 पेट्रोल की आपूर्ति की जा रही है। बाजार में भेजने से पहले इसकी रासायनिक जांच और वाहनों पर परीक्षण किया जाता है। सोशल मीडिया पर कई भ्रामक जानकारियां भी प्रसारित हो रही हैं। सरकार और तेल कंपनियां लगातार लोगों को जागरूक कर रही हैं। ई-20 के उपयोग से वाहनों में किसी व्यापक तकनीकी समस्या की पुष्टि नहीं हुई है। - अमिताभ कुमार, सेल्स मैनेजर, बीपीसीएल

असली परेशानी- पुरानी कार और बाइक
एथेनॉल काफी समय से पेट्रोल में मिलाया जा रहा है लेकिन अब इसकी मात्रा 10 से बढ़ाकर 20 फीसदी तक कर दी है। अप्रैल 2023 के बाद पंजीकृत वाहनों में इससे कोई बड़ा नुकसान सामने नहीं आया है लेकिन उससे पहले विशेषतौर पर जिन वाहनों की फिटनेस मियाद निकल गई है उनमें ई 20 पेट्रोल गंभीर समस्या बन रहा है। दरअसल, पुराने वाहन अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए नहीं बने थे।


पुराने वाहनों में मरम्मत का खर्च 60 हजार तक
पुराने शहर में कार वर्कशॉप संचालक मोहम्मद आजाद के मुताबिक, एथेनॉल पानी सोखता है। पुराने वाहनों के फ्यूल टैंक में काई जैसी काली परत जम सकती है या फिर जंग लग सकती है। उन्होंने फ्यूल पंप, इंजेक्टर, वाल्व और अन्य संबंधित उपकरण खराब होने की पुष्टि की, जिनकी मरम्मत पर 40 से 60 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है।

कहीं माइलेज, कहीं इंजेक्टर खराब
रामघाट रोड और सोनीपत में वर्कशॉप संचालक दुष्यंत चौधरी ने बताया कि उनके पास आने वाले कई ग्राहक माइलेज घटने की शिकायत कर रहे हैं। दूसरे राज्यों में उनके परिचित संचालकों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वहां फ्यूल इंजेक्टर, वाल्व और फिल्टर संबंधी शिकायतें भी सामने आई हैं।
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आपके पास पुराना वाहन तो बारिश में ये सावधानी जरूरी
फ्यूल टैंक का ढक्कन ठीक रखें
वाहन धोते समय टैंक में पानी न जाने दें
लंबे समय तक वाहन खड़ा न रखें
समय-समय पर फ्यूल फिल्टर की जांच कराएं
माइलेज अचानक घटे तो गैराज में जांच कराएं
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. 2023 में पंजीकृत वाहन
करीब 6 लाख दोपहिया वाहन
करीब 80 हजार चारपहिया वाहन
. इस साल जून तक पंजीकृत
8,37,713 दोपहिया वाहन
1,53,602 चारपहिया वाहन
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क्या कहते हैं ग्राहक
-. पहले मेरी कार एक टैंक पेट्रोल में करीब 840 किलोमीटर चलती थी, अब लगभग 620 किलोमीटर ही चल पा रही है। अभी तक सबसे बड़ी समस्या माइलेज में कमी की ही दिखी है। दीपक यादव, पेट्रोल पंप संचालक
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-. कुछ समय से बाइक का माइलेज कम हो गया है। पहले वजह समझ नहीं आई, लेकिन अब ई-20 को लेकर चर्चा बढ़ने के बाद इस पर ध्यान गया है। सौरभ कुमार, गुलजार नगर
. बाइक का माइलेज अचानक कम हुआ था। मिस्त्री से भी पूछा लेकिन स्पष्ट कारण नहीं बता पाया। अब इसे सामान्य मानकर चल रहे हैं। कुलदीप कुमार, क्वार्सी
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क्या है एथेनॉल
. यह गन्ने के रस, मक्का, टूटे चावल और कृषि अवशेषों से तैयार होने वाला 99% शुद्ध एल्कोहल (बायोफ्यूल) है।
प्रदूषण पर लगाम
. इसमें ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है, जिससे इंजन के भीतर ईधन पूरी तरह जलता है और जहरीली गैसों का उत्सर्जन काफी कम होता है।
क्यों मिला रहे हैं
. भारत अपना 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल का आयात घटता है।
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ज्यादा एथेनॉल मिलाने वाले तथ्य मिले भ्रामक
अमर उजाला की पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि शहर के पेट्रोल पंप संचालक मात्रा से ज्यादा एथेनॉल नहीं मिला रहे हैं। आठ से ज्यादा पेट्रोल पंप जाकर जब छानबीन की तो पाया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कंपनियों से आपूर्ति की जा रही है। इसमें स्थानीय स्तर पर छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। केंद्र सरकार ने 20 फीसदी एथेनॉल की मात्रा तय की है
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