रामघाट रोड पर पीएसी के पास धूल से होकर गुजरते वाहन सवार
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अहमदाबाद, बंगलूरू से भी प्रदूषित अलीगढ़
दिल्ली एनसीआर के बाद अलीगढ़ भी प्रदूषित शहरों की सूची में आ गया है। शनिवार को स्थिति यह रही कि अहमदाबाद, बंगलूरू, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से भी ज्यादा प्रदूषण यहां दर्ज किया गया। हवा में प्रदूषकों का स्तर इतना था कि लोगों ने औसतन 1.7 सिगरेट के बराबर धुएं का सेवन किया है। अगर अलीगढ़ के पिछले तीन महीने की औसतन स्थिति देखें तो धूम्रपान न करने वालों के फेफड़ों ने प्रति सप्ताह 12 और महीने में 48 सिगरेट के बराबर धुआं लिया है। शहर के चर्चित डॉक्टरों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने से दमा, सीओपीडी, हृदय रोग, एलर्जी और फेफड़ों की अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
आपके घर में कौन सबसे ज्यादा खतरे में?
- 5 साल से छोटे बच्चे
- 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग
- दमा मरीज
- हृदय रोगी
- गर्भवती महिलाएं
प्रदूषण और आपके फेफड़ों का हिसाब
- प्रतिदिन : 1.7 सिगरेट
- सप्ताह में : 12 सिगरेट
- महीने में : 48 सिगरेट
- साल में : 584 सिगरेट
सड़कों पर नहीं, अस्पताल में देखें असर
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं श्वसन रोग विभाग की रिपोर्ट बताती है कि उनके यहां प्रतिदिन 300 मरीज सीओपीडी सहित विभिन्न श्वसन संबंधी परेशानियां लेकर पहुंच रहे हैं। सीओपीडी फेफड़ों की गंभीर बीमारी है जिसमें सांस फूलना, लगातार खांसी, बलगम बनना और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी जैसे लक्षण होते हैं।
विभाग के चेयरमैन प्रो. शमीम का कहना है कि शहर की सड़कों पर उड़ती धूल और औद्योगिक प्रदूषण के कारण श्वास रोगियों की संख्या बढ़ रही है। लोगों को घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना चाहिए और सांस संबंधी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। जिला स्वास्थ्य विभाग भी बताता है कि इस साल जनवरी से लेकर अब तक 141 नए सीओपीडी मामले मिले हैं।
इस मौसम में एक्यूआई में वृद्धि का रुझान
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई के इस सप्ताह में 2020 में एक्यूआई 197 था। 2023 में एक्यूआई 114, 2024 में 108, 2025 में 136 और 2026 में अब तक 166 दर्ज किया गया है। यह 22 फीसदी की औसत वृद्धि दर दर्शाता है, जो वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या को उजागर करता है। यह वृद्धि दर भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
दिल्ली जैसे उपाय कर सकते हैं आप
सुबह 5-8 बजे वॉक से बचें
घर में पौधे लगाएं
- बच्चों को सड़क किनारे खेलने से रोकें
- एक्यूआई देखकर ही आउटडोर गतिविधि तय करें
धूल और प्रदूषण से इन बीमारियों का खतरा
एक्यूआई 50-150 तक होता है तो अस्थमा, दिल की धमनियों में ब्लॉकेज, हृदय रोगियों में घबराहट, सामान्य लोगों को एलर्जी, साइनस, सर्दी या खांसी और सीओपीडी यानी काला दमा की परेशानी होने की आशंका बढ़ जाती है।