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15 अगस्त से पहले दुर्गेश की वतन वापसी होगी

Wed, 02 Aug 2017 02:37 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
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दुर्गेश। - फोटो : अमर उजाला
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दीपक शर्मा 
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सऊदी अरब में फंसे अलीगढ़ के युवक दुर्गेश की 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस से पहले ही भारत की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास से दुर्गेश को तरहील के लिए आधिकारिक पत्र मिल गया है।

साथ ही सबसे खुशी की बात यह पता चली है कि दुर्गेश के कफील (नौकरी देने वाले) ने भी दुर्गेश के हुरूब (भगोड़े होने) को लेकर कहीं पर कोई केस आदि नहीं किया है। इसका एक मतलब यह भी है कि वह लकमा श्रेणी में नहीं है। सऊदी मामलों के जानकारों का कहना है कि यह दोनों ही बातें दुर्गेश के मामले में बहुत बड़ी राहत का संकेत हैं। अब आगे की प्रक्रिया में कोई खास दिक्कत नहीं आने की बात कही जा रही है। 
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पिछले ढाई महीने से दुर्गेश बनारस के रहने वाले सऊदी के रियाद में रह रहे महताब के यहां पर रह रहा है। महताब ही उसके खाने पीने और अन्य खर्चों का इंतजाम कर रहा है। जब से दुर्गेश के फंसे होने का मामला चर्चा में आया है तभी से दुबई में रह रहे अलीगढ़ के युवक रूपेश पाठक ने भी विदेश मंत्रालय से संपर्क कर दुर्गेश की वापसी के लिए कोशिशें की।

इसी का नतीजा यह हुआ कि मंगलवार को दुर्गेश सिंघल को रियाद स्थित भारतीय दूतावास से तहरील (समर्पण की एक औपचारिक प्रक्रिया जिसके बाद कुछ ही दिनों में एक्जिट पास मिल जाता है) के लिए पत्र जारी कर दिया गया है।

दूतावास के अटैची (श्रम) पी राजेंद्रन ने वहां के सोशल वर्क डिपार्टमेंट के नास वकोम को पत्र जारी करते हुए कहा है कि दुर्गेश कुमार का पासपोर्ट संख्या पी 0000466 हुरूब में है। आप के माध्यम से तहरील के जरिए भारत वापसी होगी तो आभार होगा। दुर्गेश अपने टिकट का खर्चा स्वयं करेगा। इसके बाद दुर्गेश की आंखों में खुशी की लहर तैर गई है। 
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अलीगढ़ सहित अन्य शहरों के युवकों ने की मदद की पेशकश
दुबई में रह रहे अलीगढ़ के रूपेश पाठक ने बताया कि दुर्गेश सिंघल के विषय में लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के बाद अलीगढ़ के भी चार पांच लोगों ने दुर्गेश की मदद की पेशकश की है। लेकिन फिलहाल उसे आगे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही है। मदद की पेशकश करने वालों में अलीगढ़ के दुबई में रह रहे निशांत गोस्वामी, दोदपुर अलीगढ़ के ही दुबई में रह रहे मो. जीशान और गोरखपुर के रहने वाले दुबई में रह रहे अभिषेक शुक्ला शामिल हैं, लेकिन रूपेश पाठक ने सभी से पेशकश के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फिलहाल तो महताब और वह स्वयं उसकी पर्याप्त मदद कर रहे हैं।  
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