राजकीय वाहन चालक महासंघ के तीन सूत्रीय मांगों को लेकर किये जा रहे चक्का जाम के पहले ही दिन सरकारी कामकाज की चाल थमती नजर आई। डीएम, कमिश्नर एवं सीडीओ को छोड़कर अन्य विभागों के अफसर चालक न आने के कारण पैदल हो गए।
उन्हें वैकल्पिक इंतजामों के सहारे काम चलाना पड़ा। सरकारी एंबुलेंस भी नहीं चली। इधर वाहन चालकों ने घंटाघर से जिला मुख्यालय तक मांगों के समर्थन में रैली निकाली। इसके बाद एसीएम को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ग्रेड वेतन 1900 से 2000 का शासनादेश जारी करने, सभी राजकीय वाहन चालकों का प्रतिशत समाप्त करने, एक माह के मिलने वाले मूल वेतन के साथ डीए जोड़ने की मांग को लेकर सोमवार से राजकीय वाहन चालकों ने चक्का जाम शुरू कर दिया।
चक्का जाम का असर इस कदर रहा कि डीएम, कमिश्नर, सीडीओ को छोड़कर अन्य अफसर पैदल हो गए। उन्हें वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे अपने सरकारी कामकाज निपटाने पड़े तो जूनियर लेबल के कई अफसर तो आटो समेत अन्य सार्वजनिक वाहनों से सफर करते देखे गए।
जबकि कई अफसरों ने संविदा चालक होने का फायदा उठाकर अपना काम चलाया। स्वास्थ्य विभाग में सरकारी एंबुलेंस खड़ी रही तो 108 व 102 एंबुलेंस सेवाएं चलती नजर आई। इधर वाहन चालकों ने जिलाध्यक्ष हरिशंकर शर्मा के नेतृत्व में घंटाघर से जिला मुख्यालय तक रैली निकालकर प्रदर्शन किया।
उन्होंने ऐलान किया कि यह चक्का जाम अनिश्चितकालीन है और मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा। इस मौके पर अमर पाल डीएम ड्राइवर, एडीएम प्रशासन के दानिश, एडीएम वित्त एवं राजस्व के प्रेम शर्मा, रफीक, धर्मवीर चौहान, रामदीन, पप्पू, गजेंद्र, रामचंद आदि समेत बड़ी संख्या में चालक मौजूद थे।